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सच्चे अर्थों में नेशन बिल्डर हैं आईआईटी जैसे संस्थान के पूर्व छात्र : रामनाथ कोविंद

Fri, 04 Oct 2019 03:40 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रुड़की/हरिद्वार
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छात्रों को डिग्री देते राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद - फोटो : अमर उजाला
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आईआईटी जैसे संस्थान के पूर्व छात्र सच्चे अर्थों में नेशन बिल्डर हैं। पूर्व छात्र अपनी मातृ संस्था में योगदान कर सकते हैं और उन्हें करना भी चाहिए। वे सभी सौभाग्यशाली हैं, जिन्होंने यहां से डिग्री ली है, लेकिन उनकी शिक्षा पर आने वाले खर्च का बड़ा हिस्सा करदाताओं ने यानी देश ने खर्च किया है।

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लिहाजा किसी भी रूप में हो, समाज का ऋण चुकाना और वंचित लोगों की मदद करना उनका नैतिक दायित्व है। ये बातें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शुक्रवार को आईआईटी रुड़की के दीक्षांत समारोह में कहीं। समारोह में 2029 छात्रों को उपाधि प्रदान की गई। वहीं, राष्ट्रपति ने नौ छात्रों को उत्कृष्ट कार्यों के लिए मेडल और प्रशस्तिपत्र देकर सम्मानित किया।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में वैज्ञानिक और तकनीकी संस्थाओं में छात्राओं का अनुपात अपेक्षाकृत कम है। उच्च स्तरीय तकनीकी संस्थाओं में छात्र संख्या बढ़ाने के लिए जरूरी कदम उठाने होंगे। इससे हमारी विज्ञान संबंधी उपलब्धियां अधिक हितकारी हो सकेंगी। उन्होंने इसरो में चंद्रयान-2 की लांचिंग के दौरान का एक वाकया सुनाते हुए कहा कि इसरो में तीन प्रोजेक्ट मैनेजरों में से दो महिला वैज्ञानिक थीं।
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एक ने उन्हें बताया कि उनका छह महीने का बच्चा है। उसे बंगलूरू में अपने माता-पिता के पास रखा है। उनकी यह सोच भारत के वैज्ञानिक भविष्य का स्पष्ट संकेत देती है। उन्होंने कहा कि आईआईटी जैसे संस्थान शिक्षा के केंद्र मात्र नहीं बल्कि नवाचार और रचनात्मक विचारों के हब भी हैं। शोध, नवाचार और रचनात्मक विचारों से ही राष्ट्रीय लक्ष्यों को प्राप्त कर मानवता की भलाई की जा सकती है। 

छात्रों के सामुदायिक कार्यों की तारीफ की 
राष्ट्रपति ने कहा कि जून 2018 में राज्यपाल सम्मेलन में उन्होंने सुझाव दिया था कि विश्वविद्यालय ‘यूनिवर्सिटी सोशल रिस्पांसबिलिटी’ को अपनाएं। उन्होंने कहा कि यह जानकर खुशी हुई कि आईआईटी रुड़की के छात्रों ने सामुदायिक कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाई है। उत्तराखंड में उन्होंने पांच गांव चिह्नित किए हैं। इन गांवों में जल प्रबंधन, स्वच्छता, दक्षता विकास आदि समस्याओं का समाधान करने के लिए ग्रामीणों के साथ काम कर रहे हैं।

इसके अलावा स्वच्छता ही सेवा के तहत हरिद्वार और रुड़की में गंगा घाटों पर स्वच्छता अभियान में हिस्सा लिया। इस तरह की पहल कर आईआईटी के छात्रों ने ‘यूनिवर्सिटी सोशल रिस्पांसबिलिटी’ को कार्यरूप दिया है। इस अवसर पर देश की राष्ट्रपति की पत्नी सविता कोविंद, राज्यपाल बेबी रानी मौर्य, मुख्यमंत्री त्रिवंद्र सिंह रावत, केंद्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, पुलिस महानिदेशक अनिल रतूड़ी, आयुक्त गढ़वाल रमन रविनाथ, आईजी गढ़वाल राजीव रौतेला आदि मौजूद थे। 

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मानव व्यवहार से तकनीक को सहजता से जोड़ना, शिक्षित व्यक्ति का कर्तव्य

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने आईआईटी रुड़की के उपाधिधारकों को बधाई देते हुए कहा कि मानव व्यवहार से तकनीक को सहजता से जोड़ना, शिक्षित व्यक्ति का कर्तव्य है। प्राप्त शिक्षा का उपयोग, देश के कल्याण में किस तरह से किया जा सकता है, इस पर विचार करें। उन्होंने कहा कि कठिन प्रतिस्पर्धा के दौर में छात्रों का जीवन काफी तनावपूर्ण हो रहा है। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के योग के संदेश को अपनाने की जरूरत है। इससे जीवन तनावमुक्त होता है और नई ऊर्जा का संचार होता है। तभी फिट इंडिया का स्वप्न साकार होगा।

प्रधानमंत्री ने पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का संकल्प लिया है। इसमें हम सभी को सहभागी बनना है। देश को मजबूत करने में अपना योगदान करना है। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का देवभूमि आगमन पर स्वागत करते हुए कहा कि आईटीआईटी रुड़की, प्रतिष्ठित संस्थान है। हमारे राज्य की पहचान है। देश दुनिया में इंजीनियरिंग के क्षेत्र में इसका बहुत बड़ा योगदान रहा है। विश्वप्रसिद्ध मैग्जीन टाईम पत्रिका में आईआईटी रुड़की को इमरजिंग यूनिवर्सिटीज रेंकिंग में विश्व में 35 वां स्थान दिया गया है। उत्तराखंड में इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, कृषि आदि क्षेत्रों के बड़े और उच्च स्तरीय संस्थान हैं, ये हमारे लिए गर्व की बात है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आईआईटी रुड़की में इसरो द्वारा अंतरिक्ष विज्ञान का प्रकोष्ठ स्थापित किया जा रहा है। इससे अंतरिक्ष के क्षेत्र में शोध को बढ़ावा मिलेगा। संस्थान ने कई विशेष उपलब्धियां भी हासिल की हैं। भूकम्प की पूर्व चेतावनी देने की तकनीक विकसित करने में अच्छा काम किया है। यह उत्तराखंड जैसे संवेदनशील राज्यों के लिए बहुत उपयोगी रहेगा। आज से 350 साल पहले मलेथा की सुरंग बनी थी और आज भी इसके माध्यम से सफलतापूर्वक पानी की आपूर्ति की जा रही है। 350 साल पहले किस तरह इसे बनाया गया, इसका अध्ययन भी किया जा सकता है।

केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक ने उपाधिधारक छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए कहा कि युवावस्था की श्रेष्ठतम ऊर्जा तथा श्रेष्ठतम संस्थान की शिक्षा आपके पास है। हर कठिन परिस्थिति को सुगम बनाने की ताकत आपके पास है। इस प्रतिभा का बेहतर प्रदर्शन करने का यही सही समय है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आईआईटी का 72 वर्षों का गौरवशाली इतिहास है। इस गौरवशाली परम्परा को संस्थान के छात्रों को कायम रखना है। प्रधानमंत्री मोदी के नए भारत एवं श्रेष्ठ भारत की संकल्पना को बेहतर तकनीक के माध्यम से साकार करने का आप माध्यम बनेंगे। उन्होंने कहा कि युवा जनसंख्या वाला हमारा देश, आप सबकी प्रतिभा के साथ हर चुनौती का सामना करेगा। हम निरन्तर प्रगति की ओर बढ़ रहे हैं। यह आप पर भी निर्भर करता है कि अपनी प्रतिभा का कैसे बेहतर से बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के निदेशक प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने संस्थान के क्रिया-कलापों की जानकारी प्रदान करते हुए बताया कि आज के दीक्षांत समारोह में 2029 छात्रों, जिनमें से 309 पीएचडी छात्र हैं, ने अपनी उपाधि ग्रहण की। इस अवसर पर देश की प्रथम महिला सविता कोविन्द, राज्यपाल श्रीमती बेबी रानी मौर्य, मुख्य सचिव श्री उत्पल कुमार सिंह, पुलिस महानिदेशक अनिल रतूड़ी, आयुक्त गढ़वाल रमन रविनाथ, आईजी.गढ़वाल राजीव रौतेला आदि उपस्थित थे। 

राष्ट्रपति ने स्वामी अवधेशानंद सरस्वती से बंद कमरे में की मुलाकात

इस दौरान 2029 छात्र-छात्राओं को उपाधि प्रदान की गई। इनमें 1018 यूजी, 702 पीजी और 309 पीएचडी डिग्री शामिल हैं। समारोह में पहली बार इंजीनियरिंग एंड साइंस के क्षेत्र में उत्कृष्ट शोध कार्यों के लिए पीएचडी कर चुके तीन छात्रों को डॉक्टरल एक्सीलेंस अवार्ड प्रदान किया गया। राष्ट्रपति के आगमन से करीब डेढ़ घंटा पूर्व आईआईटी के सभी गेटों पर एंट्री बंद कर दी गई।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का मिनट दर मिनट का कार्यक्रम तय है। आईआईटी रुड़की में कार्यक्रम के बाद दोपहर दो बजकर 20 मिनट पर राष्ट्रपति हरिद्वार के लिए रवाना हुए। बीएचईएल हेलीपैड पर उनके विमान को उतारा गया। राष्ट्रपति का काफिला यहां से वाया भगत सिंह चौक, प्रेमनगर पुल से होते हुए कनखल स्थित हरिहर आश्रम पहुंचा। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने स्वामी अवधेशानंद सरस्वती से बंद कमरे में मुलाकात की।

इससे पहले पत्नी सहित पहुंचे राष्ट्रपति का स्वामी अवधेशानंद और शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने स्वागत किया । वहीं इस कार्यक्रम में मीडिया को पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है। यह राष्ट्रपति की व्यक्तिगत यात्रा है, जिसमें मीडिया को प्रवेश की अनुमति नहीं है।

इस दौरान कोविंद आश्रम स्थित पारदेश्वर महादेव मंदिर में पूजा-अर्चना भी करेंगे। करीब डेढ़ घंटे बाद वह शाम चार बजे बीएचईएल हेलीपैड से ही जौलीग्रांट एयरपोर्ट के लिए प्रस्थान करेंगे।
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राष्ट्रपित ने इन्हें मेडल से नवाजा

पुलकित सिंघल : बीटेक मेकेनिकल इंजीनियिरिंग, प्रेजीडेंट गोल्ड मेडल अवार्ड 
(संस्थान में सबसे अधिक सीजीपीए हासिल करने पर)
ऋतुराज सिंह : बीटेक इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, इंस्टीट्यूट सिल्वर मेडल 
(संस्थान में दूसरे नंबर पर सर्वाधिक सीजीपीए हासिल करने पर)
तान्वी वर्मा : बीटेक इंजीनियिरिंग फिजिक्स, इंस्टीट्यूट ब्रॉंज मेडल
(तीसरे नंबर पर सबसे अधिक सीजीपीए हासिल करने पर)
सुमित कुमार यादव : बीटेक इलेक्ट्रानिक्स एंड कम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग, डायरेक्टर गोल्ड मेडल 
(संस्थान में बेस्ट आलराउंडर बनने पर)
शिवम जिंदल : बीटेक कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग, द प्रेजीडेंट ऑफ इंडिया डॉ. शंकर दयार शर्मा गोल्ड मेडल 
(यूजी और पीजी छात्रों में सामाजिक सेवाओं के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने पर )
अनंत वशिष्ठ : बीटेक प्रोडक्शन एंड इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग, डॉ. जयकृष्णा गोल्ड मेडल 
(यूथ लीडरशिप के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने पर)

इन्हें मिला एक्सीलेंस इन डॉक्टरल रिसर्च अवार्ड
डॉ. धीरज राज : डिपार्टमेंट ऑफ अर्थक्वेक इंजीनियरिंग
डॉ. योगेश कुमार मनीभाई मकवाना : डिपार्टमेंट ऑफ इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग 
डॉ. पल्लवी गुप्ता : सेंटर ऑफ नैनो टेक्नोलॉजी 
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