एम्स के पहले दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आठ एमबीबीएस और नर्सिंग के गोल्ड मेडलिस्ट समेत एक पीएचडी स्कालर को डिग्री सौंपी।
राष्ट्रपति ने कहा कि मुझे बेहद खुशी है कि सभी गोल्ड मेडलिस्ट बेटियां हैं। यह विकसित होते भारत का पहचान है। उन्होंने डिग्री पाने वालों बच्चों से कहा कि वह समाज के बेहद अहम समुदाय का हिस्सा बनने जा रहे हैं। डॉक्टर के पास आने वाला केवल मरीज ही नहीं होता, वह परेशानियों और चिंताओं से जूझता एक इंसान होता है। मरीज को मानवीय संवेदना और सांत्वना की बेहद आवश्यकता होती है।
उन्होंने कहा कि ऋषिकेश की प्राकृतिक संपदा का उपयोग कर वैश्विक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करें। तकनीक का उपयोग कर यहां मेडिकल टूरिज्म का हब स्थापित करने की जरूरत है। यहां समग्र चिकित्सा केंद्र को मूर्त रूप देने की अपार संभावनाएं हैं। जरूरत है कि यहां मौजूद सरकारी मशीनरी के सभी जिम्मेदार हिस्से समाज के प्रति अपनी भूमिका को सदैव याद रखें। संस्थान को यहां की स्थानीय स्वास्थ्य समस्याओं पर भी शोध करना चाहिए। गांव, ब्लॉक से लेकर जिले तक टेलिमेडिसिन तकनीक का उपयोग हो। स्टैंडर्ड प्रोटोकाल स्थापित किया जाए जिससे लोगों को अनावश्यक मेडिकल जांचों का सामना न करना पड़े।
36 अस्पतालों में सुविधाएं उपलब्ध
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बताया है कि प्रदेश के 36 अस्पतालों में टेलीमेडिसिन की अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हो चुकी हैं। यह बहुत अच्छी पहल है। राज्य सरकार ने मेडिकल क्लेम को शत प्रतिशत कवरेज का संकल्प लिया है यह अच्छी सूचना है। संभवत: ऐसा करने वाला यह पहला राज्य होगा।
राष्ट्रपति के हाथों ये बेटियां हुईं सम्मानित
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने डॉयरेक्टर मेडलिस्ट पीएचडी स्कालर रिबेका चौधरी के अलावा गोल्ड मेडलिस्ट एमबीबीएस की पास आउट अनुरीता स्वरूप निवासी हरिद्वार, प्रतिभा भाटिया निवासी लुधियाना, दीक्षा गुप्ता निवासी चंडीगढ़, अमीशा निवासी पठानकोट को डिग्री सौंपी। जबकि एमबीबीएस की गोल्ड मेडलिस्ट अर्चना जेम्स पट्टुपुरा निवासी केरला अनुपस्थित रहीं। इसके अलावा नर्सिंग की गोल्ड मेडलिस्ट शिवप्रीत निवासी लुधियाना, नेहा चंदेल निवासी हमीपुर हिमाचल प्रदेश को राष्ट्रपति के हाथों डिग्री पाने का मौका मिला।