वन्यजीव से कम नुकसान होने की संभावना
वन अनुसंधान के रिसर्च स्कॉलर मनोज कहते हैं कि खेती को बंदर, जंगली सूअर नुकसान पहुंचाते हैं। एरोमेटिक प्लांट लगाने में वन्य जीवों से नुकसान होने की आशंका बेहद कम है इसके साथ ही लोगों को रोजगार के नए अवसर के विकल्प की भी जानकारी हो सकेगी। लोग इस गार्डन में आएंगे तो पर्यटन गतिविधियों में भी इजाफा होगा।
धूप बत्ती से लेकर परफ्यूम बनाने में एरोमेटिक प्लांट का होता है उपयोग
रिसर्च स्कॉलर मनोज कहते हैं कि केदार पाती और जाटामासी का उपयोग धूप बत्ती बनाने में होता है। इसी तरह वनीला का इस्तेमाल आइसक्रीम के फ्लेवर में होता है। चंपा का इस्तेमाल सोप बनाने में होता है। शिलिग का उपयोग परफ्यूम इंडस्ट्री में (आठ लाख रुपये प्रति लीटर तेल बिकता है) होता है।
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इन प्रजातियों को लगाया जाएगा
वन अनुसंधान 2000 मीटर की ऊंचाई पर बनने वाले इस गार्डन में रोजमेरी, कपूरकचरी जूफा, चंपा, गुग्गल, धूप लक्कड़ सालविया, बद्रीतुलसी, भूतकेशी जैसी अन्य सगंध प्रजातियों को लगाएगा।