फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Uttarakhand: शराब की बोतल पर सेस लगाकर कचरा प्रबंधन की तैयारी, रोजाना 2100 टन से अधिक ठोस अपशिष्ट है निकलता

Fri, 08 May 2026 07:38 AM IST
Renu Saklani आफताब अजमत, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून

सार

 शराब की बोतल पर सेस लगाकर प्रदेश में कचरा प्रबंधन की तैयारी की जा रही है। एक रुपया प्रति बोतल सेस का प्रस्ताव शहरी विकास विभाग ने तैयार किया है। इससे होने वाली कमाई से निकायों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन होगा।

विज्ञापन
शराब की बोतल - फोटो : ani
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

उत्तराखंड में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए अब बजट की किल्लत नहीं होगी। इसके लिए शराब की बोतल पर उपकर (सेस) लगाने की तैयारी है। प्रति बोतल एक रुपये के हिसाब से जो पैसा इकट्ठा होगा, उससे सभी 108 नगर निकायों में कचरा प्रबंधन का काम कराया जाएगा।

प्रदेश में इस समय ठोस अपशिष्ट प्रबंधन बड़ी चुनौती है। जहां मैदानी क्षेत्रों के निकायों में संसाधनों का अभाव है तो वहीं पर्वतीय क्षेत्रों में ठोस अपशिष्ट एकत्र करने और उसके निस्तारण के लिए भारी बजट की जरूरत है। इन सभी चुनौतियों के बीच शहरी विकास विभाग अब बजट की नई राह तलाश रहा है। इसके लिए प्रदेश में शराब की बोतल पर सॉलिड वेस्ट सेस लगाया जाएगा। इसका प्रस्ताव शहरी विकास विभाग ने तैयार कर लिया है।

सचिव शहरी विकास नितेश कुमार झा ने बताया कि शहरी निकायों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, इसके लिए होने वाले रोजमर्रा के खर्चों के लिए हमने प्रस्ताव तैयार किया है। यह जल्द ही मुख्य सचिव के समक्ष रखा जाएगा। मकसद ये है कि निकायों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन का काम पुख्ता हो।

अभी तीन रुपये लिया जा रहा है सेस

उत्तराखंड सरकार ने आबकारी नीति के तहत शराब की प्रति बोतल पर तीन रुपए का उपकर(सेस) लगाया हुआ है। इसमें से एक रुपया गो सेवा, एक रुपया महिला कल्याण और एक रुपया खेल के लिए उपयोग किया जाता है। आबकारी विभाग इसे सेस के बजाय अतिरिक्त शुल्क के रूप में एकत्र करता है। अब चौथा शहरी विकास विभाग का भी एक रुपया इसमें जोड़ने की तैयारी है।

ये भी पढ़ें...Uttarakhand: अनियमितताएं मिलने पर 23 मदरसों की रोकी सरकारी सहायता राशि, दस संचालकों ने दिया बंदी का नोटिस

2100 टन से अधिक ठोस अपशिष्ट

उत्तराखंड में वर्तमान में रोजाना करीब 2100 टन से अधिक ठोस अपशिष्ट निकलता है। इसमें से ज्यादातर कचरा जमीनों पर लैंडफिल के तौर पर जमा होता है। आज भी प्रदेश में 60 से अधिक डंपिंग साइट हैं, जिनमें करीब 23 लाख मीटि्रक टन पुराना कचरा जमा है। कुल मिलाकर देखें तो प्रदेश में 40 से 45 प्रतिशत ठोस अपशिष्ट का ही प्रबंधन हो पा रहा है। कचरे के ढेर बढ़ते जा रहे हैं, जिनसे पार पाना बड़ी चुनौती है।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें