उत्तराखंड में नगर निकाय चुनाव 2018 भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियों के लिए आसान नहीं होगी। प्रदेश में तीसरा मोर्चा गठन की तैयारी हो चुकी है, जिससे इस बड़ी पार्टियों के समीकरण बिगड़ सकते है।
प्रदेश में बदलते हुए राजनीतिक हालात में गैर भाजपा और गैर कांग्रेस दलों को एक मंच पर लाने की कोशिश शुरू हो गई है। छह दलों ने एक मंच पर आकर नगर निगम, विधानसभा और लोकसभा के चुनाव लड़ने का फैसला लिया है, ताकि वोट का विभाजन नहीं हो सके।
फैसला लिया गया है कि समान विचारधारा वाले दलों को भी इस मंच में शामिल किया जाएगा। ताकि सशक्त तीसरा मोर्चा का गठन किया जा सके।सपा प्रदेश कार्यालय पर रविवार को समान विचारधारा वाले राजनीतिक दलों की बैठक सपा के जिलाध्यक्ष गुलफाम अली की अध्यक्षता में हुई।
बैठक में यह फैसला लिया कि उत्तराखंड में नगर निकाय के चुनाव बैलेट पेपर से कराने की मांग चुनाव आयोग से की जाएगी, क्योंकि ईवीएम की विश्वसनीयता को लेकर संदेह व्यक्त किया जा रहा है। बैठक में मौजूद नेताओं ने कहा कि चुनाव में फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल कर रहे हैं।
दूरदर्शन और आकाशवाणी पर मन की बात कह कर गुजरात विधानसभा के चुनाव और उत्तर प्रदेश के नगर निकाय चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं, जो आचार संहिता का उल्लंघन है। बैठक में मोदी के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया गया।
इन दलों के नेता एक मंच पर आए
निकाय चुनाव
जनता दल (एस) के प्रदेश अध्यक्ष हरजिंदर सिंह, राष्ट्रीय जन सहाय दल के प्रदेश प्रभारी रूप चंद्र मंदरवाल, जनता दल (यू) के प्रदेश अध्यक्ष प्रमोद शर्मा, सीपीआई (एम) के जिला सचिव लेखराज शर्मा, नगर सचिव शंभू प्रसाद ममगाई और आरजेडी (एस) के सुरेंद्र सिंह शाह।
बैठक में सपा सांस्कृतिक सभा के प्रदेश अध्यक्ष महितोष मैठाणी, सपा के महानगर अध्यक्ष आलोक राय, महानगर प्रमुख महासचिव नासिर मंसूरी, सपा प्रदेश कोषाध्यक्ष दिनेश मोहन नैथानी, प्रदेश उपाध्यक्ष अतुल शर्मा, सपा छात्र सभा के प्रदेश अध्यक्ष अर्जुन शर्मा, जिला महासचिव लियाकत अब्बासी, अभिषेक भंडारी, नवीन शर्मा, सईद अहमद और गोपाल रावत मौजूद रहे।