इस दौरान परिचालक द्वारा दंपति से किराये को लेकर बदतमीजी की गई लेकिन बस में सवार किसी भी महिला व पुरुष यात्री ने इसका विरोध नहीं किया। लाचार मोहन सिंह ने दर्द से कहराती पत्नी को बस से उतार दिया।
इसी समय मोहन सिंह ने 108 को भी फोन कर दिया। जैसे ही महिला सड़क किनारे बैठने को हुई, उसे तेज रक्तस्राव होने लगा और कुछ देर में बच्चा पैदा हो गया। लेकिन त्वरित उपचार के अभाव में नवजात ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
इसके बाद महिला के पति ने निकट ही मृत नजवात को दफना दिया। हैरत यह है कि इस दौरान हाईवे से कई छोटे-बड़े वाहन गुजरते रहे। लेकिन किसी ने भी इन लोगों की तरफ देखना उचित नहीं समझा।
दोपहर करीब 11 बजे जिला चिकित्सालय रुद्रप्रयाग से एम्बुलेंस मौके पर पहुंची और महिला को अस्पताल लाई। यहां वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. डीवीएस रावत ने पीड़िता की जांच कर उचित उपचार किया। बताया कि स्थिति समान्य है। इधर, महिला के पति ने बताया कि वह बीते मंगलवार को अपनी पत्नी को लेकर जिला चिकित्सालय गोपेश्वर (चमोली) गया था।
यहां डॉक्टरों ने अल्ट्रासाउंड व अन्य जरूरी जांचे कीं। पूरे दिन उन्होंने स्थिति से अवगत नहीं कराया। लेकिन शाम 4 बजे के बाद कहा कि सामान्य डिलीवरी होना संभव नहीं है। बच्चे की धड़कन काफी कम है, हायर सेंटर ले जाओ।
अस्पताल से एम्बुलेंस की सुविधा मुहैया नहीं कराई गई। मजबूरी में मुझे अपनी पत्नी को बस से अस्पताल लाना पड़ा। लेकिन रास्ते में ही उसकी तबीयत खराब हो गई। दूसरी तरफ जिला चिकित्सालय गोपेश्वर के सीएमएस डॉ. शैलेंद्र कुमार ने बताया कि नंदी देवी के परीक्षण के बाद उसे हायर सेंटर जाने की सलाह दी गई थी। पीड़िता की तरफ से वाहन की मांग नहीं की गई। इसके बाद का मामला मेरे संज्ञान में नहीं है।