राजकीय जिला गांधी शताब्दी अस्पताल में मरीजों को ईसीजी जांच की सुविधा नहीं मिल पा रही है। इसकी वजह से गर्भवती महिलाओं को ईसीजी जांच के लिए आधा किलोमीटर दूर कोरोनेशन अस्पताल जाकर जांच करानी पड़ती है। वहां से फिर डॉक्टर को जांच रिपोर्ट दिखाने के लिए वापस गांधी शताब्दी अस्पताल पहुंचना होता है।
इस तरह से एक बार की ईसीजी जांच के लिए गर्भवतियों को एक किलोमीटर का चक्कर काटना पड़ रहा है। एकमात्र तकनीशियन के शनिवार को सेवानिवृत्त होने से दिक्कत और बढ़ने वाली है। बता दें कि कोनोना मरीजों के बढ़ने पर राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल को पूरी तरह से कोविड अस्पताल में तब्दील कर दिया था।
इसके बाद महिला विंग में उपचार को पहुंचने वाली महिलाओं को गांधी शताब्दी अस्पताल भेजा जाने लगा। अब हालांकि दून अस्पताल में सभी तरह की ओपीडी और ऑपरेशन आदि सुविधाएं शुरू कर दी गई हैं। इसके बावजूद कोविड के डर से अब भी दून अस्पताल में मरीज कम पहुंच रहे हैं।
गर्भवती और अन्य महिला मरीज भी दून अस्पताल में कम ही जा रही हैं। इससे गांधी शताब्दी अस्पताल में गर्भवती महिलाओं के उपचार और डिलीवरी आदि का दबाव अधिक है। गांधी शताब्दी में गर्भवती महिलाओं को सबसे ज्यादा दिक्कत ईसीजी जांच को लेेकर हो रही है।
रूटीन या इमरजेंसी की स्थिति और प्रसव से पहले डॉक्टर ईसीजी जांच की सलाह देते हैं। डॉक्टर के पर्चे को लेकर गांधी शताब्दी अस्पताल से गर्भवती राजकीय जिला अस्पताल के कोरोनेशन अस्पताल पहुंचती हैं। वहां पर भी उन्हें अपनी बारी के लिए इंतजार करना पड़ता है।
ईसीजी जांच जरूरी, लेकिन ज्यादा दूर आने-जाने में जोखिम
ईसीजी जांच आमतौर पर दिल तक रक्त पहुंचाने वाली वाहिकाओं में परेशानी, ऑक्सीजन की कमी, नसों के ब्लॉकेज, टिशूज की असामान्य स्थिति, सीने में तेज दर्द या सूजन, सांस लेने में तकलीफ, हार्ट अटैक के लक्षणों और दिल से जुड़ी अन्य समस्याओं का पता लगाने के लिए की जाती है।
शास्त्रीनगर निवासी अरिहंत अस्पताल के वरिष्ठ महिला एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. विदुष जैन जयाला ने बताया कि प्रसव खासकर सीजेरियन से पूर्व ईसीजी जांच जरूरी है। कई बार कुछ अन्य परेशानी महसूस होने पर डॉक्टर ईसीजी की सलाह देते हैं।
डॉ. जयाला ने बताया कि गर्भावस्था के अंतिम दिनों या आपात स्थिति में गर्भवती के ज्यादा दूर आने-जाने और लाइन में देर तक खड़ा होना जोखिम भरा हो सकता है। ऐसे में जिस अस्पताल में महिला की डिलीवरी हो रही है, वहीं ईसीजी जांच की व्यवस्था होनी चाहिए।
गांधी शताब्दी अस्पताल में अब तक एक्सरे और ईसीजी जांच के एकमात्र तकनीशियन थे। इसलिए गर्भवतियों को मजबूरन कोरोनेशन अस्पताल भेजा जाता है। यह तकनीशियन भी शनिवार को सेवानिवृत्त हो जाएंगे। इसे देखते हुए जिलाधिकारी को पत्र लिखकर संविदा पर तत्काल एक तकनीशियन रखे जाने की अनुमति देने का अनुरोध किया गया है। साथ ही ईसीजी जांच के लिए भी तकनीशियन की आवश्यक्ता से महानिदेशालय को अवगत कराया गया है।
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डॉ. मनोज उप्रेती, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक, राजकीय जिला अस्पताल