शिशु के गर्भ में आते ही उसे बेहतर भविष्य के लिए अच्छे संस्कार देने पर अब उत्तराखंड का स्वास्थ्य महकमा काम करेगा। बदलते परिवेश में जिस तरह नैतिक मूल्यों का विघटन हो रहा है उसके लिए शिशु के गर्भ में आते ही तैयारी की जा रही है।
स्वास्थ्य महकमा गायत्री परिवार की गर्भस्थ माताओं के लिए वैज्ञानिक विधि पर आधारित एक्शन प्लान को जच्चा बच्चा स्वास्थ्य योजना का हिस्सा बनाने जा रही है। वैज्ञानिक पहलुओं के समावेश से तैयार गायत्री परिवार शांतिकुंज के चिकित्सा विशेषज्ञों ने शनिवार को अपनी कार्ययोजना को महानिदेशालय स्वास्थ्य के साथ साझा किया।
गायत्री परिवार में शामिल चिकित्सा क्षेत्र अनुभवी विशेषज्ञों ने समाज में पैदा हो रहे विकारों को पार पाने के लिए प्राचीन ज्ञान को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़कर इसका समाधान तलाशा है। विशेषज्ञों का मानना है कि गर्भ में शिशु के आते ही उसमें अच्छे संस्कारों को डाला जा सकता है।
शोधकर्ताओं के मुताबिक गर्भावस्था में ज्ञानेंद्रियों, कर्मेंद्रियों के साथ मस्तिष्क विकास हो जाता है। यह वह समय होता है जहां शिशु सीखना शुरू कर देता है। प्राचीन समय में संस्कार रोपण की प्रक्रिया को गर्भाधान संस्कार से किया जाता था, जिसकी अब आधुनिक विज्ञान ने पुष्टि कर दी है।