पहाड़ों पर बरसात के दौरान अचानक खिसकने वाले पहाड़ न केवल परेशानी का सबब बनते हैं, बल्कि इससे जानमाल को भी नुकसान होता है।
अब इस समस्या के आने से पूर्व ही निपटने की राह आसान हो सकेगी। इसके लिए केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान रुड़की की ओर से अलकनंदा घाटी के ग्राम पाखी पीपलकोटी में वेधशाला स्थापित की गई है। वायरलेस सेंसर नेटवर्क के जरिये संस्थान इस वेधशाला से भूस्खलन की पूर्व चेतावनी जारी करेगा।
गढ़वाल हिमालय के अलकनंदा घाटी के ग्राम पाखी (पीपलकोटी) के आसपास का क्षेत्र भूस्खलन के लिहाज से काफी संवेदनशील है। यहीं पर संस्थान की ओर से भूस्खलन की पूर्व चेतावनी जारी करने के लिए वेधशाला स्थापित की है।
संस्थान के निदेशक प्रो. श्रीमान कुमार भट्टाचार्य ने बताया कि वेधशाला में लगे सेंसर का डाटा प्रतिक्षण संस्थान में लगाए गए डाटा एक्जीविशन सिस्टम (डीएएस) पर मिलता रहेगा। इसके जरिए आने वाली ऋतु के डाटा का विश्लेषण किया जाएगा जिसके आधार पर भविष्य में होने वाले भूस्खलन की पूर्व चेतावनी दी जा सकेगी।
उन्होंने बताया भूस्खलन पूर्व चेतावनी सिस्टम को विकसित कर लिए जाने के बाद अब किसी बड़ी भूस्खलन आपदा आने से पूर्व लोगों को चेतावनी दी जा सकेगी। आपदा प्रबंधन विभाग को भी त्वरित काम करने का मौका मिलेगा।
लगाया जाएगा ऑटोमेटिक वेदर स्टेश
यातायात को सुचारु बनाए रखने में भी मदद मिलेगी। 21 फरवरी को ग्राम पाखी में इस वेधशाला का उद्घाटन किया गया। इस दौरान संस्थान निदेशक के अलावा इस परियोजना में शामिल वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डा. शांतनु सरकार, प्रधान वैज्ञानिक डा. डीपी कानूनगो एवं प्रोजेक्ट फैलो अनिल मलेठा, मोहम्मद आतिफ, नीलू शर्मा तथा मनाली सिंह मौजूद रहे।
भूमि के भीतर और बाहर की हलचल मापेंगे उपकरण
वेधशाला में लगाए गए सेंसर के अंतर्गत भूमि के अंदर होने वाली हलचल मापने के लिए इनक्लाइनोमीटर, सतह पर होनी वाली हलचल के लिए वायरलाइन एक्सटेसोमीटर, भूमि के अंदर जलस्तर मापने के लिए पीजोमीटर नाम के उपकरण लगाए गए हैं। बारिश, आर्र्दता, तापमान तथा हवा के वेग एवं दिशा के रिकार्ड के लिए ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन लगाया गया है।
इस तरह काम करेगी वेधशाला
दरअसल, संस्थान के वैज्ञानिकों की ओर से संबंधित स्थल व इसके आसपास विगत ऋ तुओं के डाटा एकत्र किए गए हैं। इस बात का विश्लेषण किया गया है कि विगत वर्षों में मौसम के किस रुख पर जगह-जगह पर भूस्खलन हुए हैं।
अब भविष्य में होने वाले ऋतु परिवर्तन को पुराने डाटा के आधार पर मिलान किया जाएगा। जिससे भूस्खलन की चेतावनी जारी की जाएगी। इसके लिए बाकायदा मैथमेटिकल माडलिंग की गई है। जो त्वरित रूप से सटीक भविष्यवाणी करने में सहायता उपलब्ध कराएगा।