भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने भूगर्भ से नदियों के पानी के साथ निकलने वाली बहुमूल्य धातुओं को खोजने के लिए कार्ययोजना बनाई है।
इसमें मुख्य रूप से तांबा, शीशा, जस्ता मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा सोना, प्लेटिनम आदि की भी तलाश की जाएगी। इनके कण नदियों के उद्गम से कुछ किलोमीटर दूर तक पाए गए हैं। इस संबंध में चमोली जनपद के भराड़ीसैंण इलाके में रामगंगा के किनारे काम शुरू किया जा चुका है।
वैज्ञानिकों ने बताया कि नदियों की प्रवृत्ति होती है कि पानी के साथ निकले अनेक प्रकार के खनिजों को किनारों पर जमा करने लगती हैं। लिहाजा, उनके उद्गम से कुछ किलोमीटर बाद तक नदी तट पर बहुमूल्य खनिजों की मौजूदगी की ज्यादा संभावनाएं होती हैं।
वैसे हल्के खनिज आगे तक साथ जाते हैं। कौन सा खनिज कितनी दूरी तक साथ जाएगा, यह उनके वजन और नदी के वेग पर निर्भर करता है। कई दशक पहले भी इस दिशा में कुछ काम हुआ था, लेकिन संतोषजनक परिणाम नहीं मिलने पर इसे रोक दिया गया।
इस बीच विदेशों में इस मामले पर काफी काम किया गया, जिनके बेहतर परिणाम सामने आए। इसके अलावा अब अपने देश में भी इस संबंध में शोध के लिए नई तकनीक मुहैया हो गई है। इसलिए अब नई तकनीक के सहारे जांच और खोज की जाएगी।
विभाग के वैज्ञानिकों का कहना है कि उत्तराखंड से कई प्रमुख नदियां निकलती हैं, इसलिए यहां की गंगा व इसकी बड़ी सहायक नदी सरयू, रामगंगा आदि के किनारों पर यह खोज चलेगी। इन नदियों के किनारे तांबा, जस्ता, शीशा मिलने की प्रबल उम्मीद है।
इसके अलावा सोना, प्लेटिनम जैसी ज्यादा कीमती धातुओं के भी होने की आशा है। अभी भराड़ीसैंण में शुरुआती चरण का कार्य हो रहा है। इसके बाद अन्य नदियों के किनारों भी खोजबीन की जाएगी।
नदियां भूगर्भ से अपने पानी के साथ अनेक खनिज भी बाहर लाती हैं। पानी तो बहता जाता है, पर धातुएं किनारों पर जमा होने लगती हैं। इनकी खोज के लिए शुरुआती चरण का कार्य चल रहा है।
- भूपेंद्र सिंह, निदेशक (भूस्खलन), भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, देहरादून