विधानसभा चुनाव में कथित तौर पर आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन और टीम पीके (प्रशांत किशोर) की मदद करने आदि आरोपों में पुलिस, परिवहन और आबकारी विभाग के अफसर मुश्किल में फंसते दिख रहे हैं। इस मामले में एक याचिका उत्तराखंड हाईकोर्ट में दाखिल हुई थी, इसमें हाईकोर्ट ने केंद्रीय निर्वाचन आयोग को वादी के प्रार्थनापत्र पर प्रकरण को कानून के हिसाब से देखने और उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। जिन अफसरों की भूमिका को लेकर याचिका दाखिल की गई है, उसमें तत्कालीन आबकारी सचिव व परिवहन आयुक्त, एसएसपी नैनीताल, रामनगर कोतवाल (जिला नैनीताल) शामिल हैं।
कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव का समर जीतने के लिए पीके की सेवाएं ली थीं। रामनगर के रहने वाले अरविंद कुमार नामक व्यक्ति ने टीम पीके को सरकारी मदद उपलब्ध कराने और आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करने की शिकायत को लेकर हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की बेंच में याचिका दाखिल की थी।
इसमें टीम पीके को कथित तौर पर तत्कालीन आबकारी सचिव व परिवहन आयुक्त की तरफ से वाहन उपलब्ध कराना, उसकी चेकिंग न करने का आदेश देना आदि बात कही गई। आरोप था कि इसके लिए परिवहन मुख्यालय से बाकायदा एक ई-मेल तक अफसरों को भेजी गई। इस मामले में शुरुआती जांच भी हुई थी। बताया जाता है कि इसमें कुछ परिवहन कार्यालयों से ई-मेल प्राप्त होने की बात स्वीकारी गई थी, लेकिन मौखिक निर्देश से इनकार किया गया था।