प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 31 दिसंबर तक ही रबी में बीमा किया जाएगा। बैंकों, सहकारी संस्थाओं से साल के अंतिम दिन तक कर्ज लेने वाले ही बीमित किए जाएंगे। यह शर्त गेहूं और मसूर दोनों फसलों पर लागू होगी। दूसरी ओर इस तिथि के बाद किसानों को इन संस्थाओं से फसल संबंधी कर्ज भी नहीं मिल पाएगा।
उत्तराखंड के सभी जिलों में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत गेहूं के लिए बीमा की सुविधा सभी किसानों को दी जा रही है। पौड़ी और पिथौरागढ़ के किसानों को मसूर की फसल के लिए भी बीमा का लाभ मिलेगा। प्रदेश में मसूर की फसल को इसी साल से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत चयनित किया गया है।
अधिकारियों का कहना है कि इस बार दोनों मंडलों के एक-एक जिलों को शामिल किया गया है पर अगले साल कुछ और जिले बढ़ाए जाएंगे। इस साल प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में शामिल होने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर रखी गई है। इसके बाद स्वैच्छिक रूप से बीमा कराने वाले गैर ऋणी किसानों को भी इसमें शामिल नहीं किया जा सकेगा।
चूंकि फसल बीमा नहीं हो सकेगा इसलिए किसानों को इन संस्थाओं से कर्ज भी नहीं मिल पाएगा। इसका कारण यह है कि फसल के लिए कर्ज मंजूर होने के साथ-साथ बीमा कराना अनिवार्य होता है।
इस संबंध में पूरे प्रदेश के किसानों को फसल बीमा कराने वाली सरकारी क्षेत्र की कंपनी एग्रीकल्चर कंपनी ऑफ इंडिया (एआईसी) के क्षेत्रीय प्रबंधक डॉ. एस. प्रसाद ने बताया कि बैंक व सहकारी संस्थाएं 31 दिसंबर तक ही किसानों को शामिल करेंगी। इसका कारण यह है कि उनको प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लाभार्थी किसानों के प्रस्तावपत्र व बीमा शुल्क की धनराशि 15 जनवरी तक एआईसी के पास जमा करवाना अनिवार्य है।