उत्तराखंड में सामान्य मतों के लिहाज से कांग्रेसी और अन्य उम्मीदवार बेशक भाजपा से गाहे-बगाहे बाजी मारते रहे हों लेकिन जहां तक पोस्टल बैलेट (डाक के जरिए वोटिंग) का सवाल है भाजपा ने सभी दलों को परास्त किया है।
हमेशा से पोस्टल बैलट भाजपा के खाते में अधिक गिरते हैं। 2009 के लोकसभा चुनाव में भाजपा बेशक पांचों सीट हार गई, लेकिन पोस्टल बैलेट में भाजपा ने कांग्रेस से अधिक मत हासिल किए।
इस बार 91 हजार पोस्टल बैलट वोट
इससे पहले पौड़ी-गढ़वाल के संसदीय उपचुनाव 2008 के अलावा टिहरी उपचुनाव 2012 में भी पोस्टल वोट में भाजपा ने बाजी मारी।
उत्तराखंड में लगभग 91 हजार सैनिक पोस्टल बैलट से अपने मताधिकार का प्रयोग लोकसभा चुनाव में करेंगे। 2009 के संसदीय चुनाव नए परिसीमन से हुए, जिसमें भाजपा के बड़े-बड़े धुरंधर तो हारे लेकिन पोस्टल बैलेट में भाजपा आगे रही।
इससे पहले पौड़ी संसदीय उपचुनाव 2008 में भाजपा प्रत्याशी पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल टीपीएस रावत के खाते में लगभग दस हजार पोस्टल बैलेट आए जिनसे उनकी जीत सुनिश्चित हुई। टिहरी संसदीय उपचुनाव 2012 में भाजपा प्रत्याशी माला राज्यलक्ष्मी शाह को 1486 पोस्टल बैलेट मिले जबकि कांग्रेस के साकेत को एक हजार पोस्टल बैलेट मिले।
2009 लोकसभा चुनाव में किसे मिले कितने पोस्टल बैलेट
लोकसभा---------भाजपा------------------कांग्रेस
टिहरी-----------जसपाल राणा-1551---------विजय बहुगुणा- 7
पौड़ी------------टीपीएस रावत- 8030------सतपाल महाराज- 950
अल्मोड़ा---------अजय टम्टा- 887-----------प्रदीप टम्टा- 514
नैनीताल---------बची सिंह रावत-271-------केसी सिंह बाबा- 172
हरिद्वार----------स्वामी यतींद्रा नंद गिरी-307---हरीश रावत- 188
जनरल बीसी खंडूड़ी के नाम पर मिले वोट
पौड़ी संसदीय सीट सीट पर पोस्टल बैलेट अहम रहे हैं। इस सीट पर सर्वाधिक सैन्य वोट हैं, जिसमें पूर्व सैनिकों की संख्या 45 हजार और कार्यरत सैनिकों की 15 हजार के करीब है।
पौड़ी सीट से जनरल बीसी खंडूड़ी और जनरल टीपीएस रावत को ही ज्यादातर पोस्टल बैलेट मिलते रहे हैं। 2004 लोकसभा चुनाव में जब दोनों जनरल आमने-सामने हुए तब भी भाजपा के खाते में पोस्टल बैलेट अधिक आए।
इस बार जनरल खंडूड़ी के मुकाबले में कांग्रेस ने हरक सिंह रावत को उतारा है, जिससे एक बार फिर अपनी सैन्य पृष्ठिभूमि का फायदा जनरल को मिल सकता है।