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उत्तराखंड बोर्ड के स्कूल बढ़े, छात्र घटे

Sat, 14 Feb 2015 01:06 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड में शिक्षा के स्तर को बढ़ावा देने के नाम पर लगातार नए हाईस्कूल तो खोले जा रहे हैं, लेकिन उतनी ही तेजी से हाईस्कूल के छात्रों की संख्या में भी गिरावट आ रही है।
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इस अवधि में प्रदेश में सैकड़ों स्कूल खुले, जबकि हाईस्कूल के 9020 परीक्षार्थी घट गए हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि  सरकारी स्कूलों में सुविधाओं का अभाव, तेजी से खुले अंग्रेजी माध्यम विद्यालय और पहाड़ों से हुआ पलायन इसकी अहम वजह है।

प्रदेश सरकार हर साल नए हाईस्कूल खोलने की घोषणा कर रही है। राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत 271 विद्यालय जूनियर हाईस्कूल से हाईस्कूल के रूप में उच्चीकृत हुए हैं, जबकि 350 विद्यालयों को हाल ही में अनुदान सूची में शामिल किया गया है। स्कूलों के नाम पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसके बावजूद छात्रसंख्या घट रही है।
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प्राथमिक शिक्षा पहले ही बदहाल

प्रदेश में प्राथमिक शिक्षा छात्रों की संख्या में गिरावट के लिहाज से पहले ही बदहाल है। पिछले तीन वर्षों में 53 हजार बच्चे कम हो गए। वर्ष 2012-13 में पांच लाख 58 हजार बच्चे थे, जबकि अब पांच लाख पांच हजार। दूसरी ओर, 18 सौ से अधिक विद्यालय बंदी की कगार पर हैं।

आंकड़ों पर नजर
-वर्ष 2012 में हाईस्कूल में 182246 परीक्षार्थी थे, जबकि वर्ष 2015 की परिषदीय परीक्षा में 173226 परीक्षार्थी बैठने वाले हैं
-वर्ष 2009-10 से अब तक राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत प्रदेश में 271 विद्यालय हाईस्कूल के रूप में उच्चीकृत किए जा चुके हैं
-प्रदेश में इस अवधि में हाईस्कूलों की कुल संख्या 1056 हो चुकी है, जबकि सरकारी इंटर कालेजों की कुल संखय 1238 है

सरकारी स्कूलों में घटती छात्र संख्या चिंता का विषय है। इसके पीछे अकसर पलायन को वजह बताया जाता है, लेकिन सिर्फ यही बात नहीं है। अगर ऐसा होता तो गांवों से दून, ऊधमसिंह नगर, हरिद्वार में बसे लोगों के बच्चे सरकारी स्कूलों में होते और पहाड़ के मुकाबले यहां छात्रसंख्या अधिक होती। इसकी मुख्य वजह स्कूलों में बुनियादी संसाधन, शैक्षिक माहौल न मिल पाना ही है। वोट के लिए थोक के भाव स्कूल खोलने से लाभ नहीं है। इसके बजाय पहले से मौजूद स्कूलों में बेहतर सुविधाएं दी जानी चाहिए।
-पुष्पा मानस, पूर्व शिक्षा निदेशक
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