सीमांत के व्यापारियों ने भारत-चीन व्यापार के लिए सामान भेजना शुरू कर दिया है। व्यापारी यात्रा मार्ग की खराब स्थिति को देखते हुए चीन में मांग वाले सामान को खच्चरों में लादकर पहले ही अगले पड़ावों के लिए भेज रहे हैं।
हर साल कैलाश मानसरोवर यात्रा के साथ ही जून में भारत-चीन व्यापार भी शुरू होता है। प्रशासन व्यापार के लिए तकलाकोट मंडी जाने वाले व्यापारी और हेल्परों के लिए ट्रेड पास जारी करता है। भारत से सीमांत धारचूला के व्यापारी सामान लेकर चीन की तकलाकोट मंडी में जाते हैं। चीन में गुड़, मिश्री, रेडीमेड कपड़े, सौंदर्य प्रसाधन आदि सामग्री ले जाते हैं, जबकि वहां से ऊनी कपड़ों और ऊन का आयात होता है। पिछले साल चीन सीमा के लिए सड़क निर्माण के कारण पिछले साल व्यापारियों को अपने सामान को गुंजी पहुंचाने में काफी परेशानी हुई थी।
भारतीय व्यापारियों को अपने सामान को नजंग में रास्ते में ही तिरपाल और टेंटों में रखना पड़ा था। सामान नहीं पहुंच पाने से व्यापारियों को काफी परेशानी उठानी पड़ी थी। इस समय भी सड़क का निर्माण कार्य जारी है। बरसात में भूस्खलन और मार्ग के बंद होने से सामान ले जाने में परेशानी न हो इसको देखते हुए व्यापारियों ने अभी से सामान खच्चरों में लादकर भेजना शुरू कर दिया है। व्यापारी नरेंद्र रायपा, दीवान रायपा और धर्म सिंह रायपा सहित अन्य लोगों ने अपने अपने सामान गरबादर, मालपा, लामारी और बूंदी तक घोड़े खच्चरों से पहुंचा रहे हैं। व्यापारी नरेंद्र सिंह रायपा ने बताया कि मालपा और लामारी के बीच रास्ता खराब होने के कारण उनके खच्चर एक सप्ताह तक फंसे थे। उन्होंने स्वयं के खर्चे से रास्ता ठीक करके खच्चरों को आगे भेजा।
इन वस्तुओं का होता है व्यापार
भारतीय व्यापारी भारत से गुड़, मिश्री, रेडीमेड कपड़े, एल्यूमीनियम के बर्तन, कॉफी, टॉफियां, सुर्ती, नश्वार, सौंदर्य प्रसाधन का सामान लेकर गए हैं। जो तकलाकोट से ऊन, गोट पसम, तिब्बती चाय, छिरबी, याक की पूंछ, जैकेट, कंबल, जूते, चीन निर्मित रजाइयां ‘चरू‘ आदि लेकर भारत आएंगे।