दरअसल 27 अगस्त की रात लूटपाट के दौरान बदमाशों ने पूनम पांडेय की धारदार हथियाराें से मार कर हत्या कर दी थी, इस हमले में उनकी बेटी अर्शी भी गंभीर रुप से घायल हो गई थी। हत्याकांड के अगले दिन ही पुलिस ने जल्द खुलासे का दावा तो ठोंक दिया था, लेकिन समय के साथ उसकी पोल खुलती चल गई। एसटीएफ और एसआईटी दर्जनों लोगों से पूछताछ करने के बाद भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी।
अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था अशोक कुमार ने सोमवार को हत्याकांड में अब तक हुई कार्रवाई की जानकारी ली। उन्हाेंने 91 दिन बीतने के बाद पुलिस का हाथ खाली होने पर असंतोष जताया। एडीजी ने विवेचक को शक के दायरे में आए लोगों का पॉलीग्राफी टेस्ट कराने के निर्देश दिए, ताकि पूरी तस्वीर साफ हो सके। शक के दायरे में मृतका पूनम पांडेय के करीबी भी शामिल है। पुलिस को जिन लोगों पर शक है, उनकी संख्या पांच से छह बताई जा रही है।