दिवाली पर हुई आतिशबाजी से आबोहवा में घुली जहरीली गैसों के बुरे प्रभाव सामने आने लगे हैं। देहरादून के अस्पतालों में सांस के रोगियों की संख्या बढ़ी है। इसके अलावा त्वचा और आंख संबंधी बीमारियां के मरीज भी सामने आ रहे हैं।
अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ी
पर्यावरण विज्ञानियों के मुताबिक दिवाली पर जले पटाखों ने हवा में कार्बन मोनो ऑक्साइड जैसे खतरनाक रसायनों की मात्रा बढ़ा दी है।
कार्बन मोनो आक्साइड फेफड़ों को सीधे प्रभावित करती है। इन रसायनों से बच्चों और सांस के रोगियों को घुटन की समस्या पैदा हो रही है। ऐसे में अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है।
दून अस्पताल की ओपीडी में दमा, सांस फूलने, गले में इंफेक्शन, खांसी और अन्य सांस संबंधी बीमारियों के रोजाना सौ से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। इसी तरह त्वचा संबंधी समस्या से पीड़ित मरीजों की संख्या भी डेढ़ सौ के आंकड़े को पार कर रही है।
आंखों में इंफेक्शन और जलन की शिकायत के मरीज भी इलाज को अस्पताल आ रहे हैं। बता दें कि पटाखों के धुएं से शहर में वायु प्रदूषण कई गुना बढ़ गया था। खासकर नेहरू कॉलोनी, रायपुर रोड और घंटाघर इलाके में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सबसे अधिक वायु प्रदूषण दर्ज किया था।
सांस संबंधी मरीज अधिक आ रहे हैं। दमा के पुराने मरीजों की परेशानी भी बढ़ी है। ऐसे मरीजों को इनहेलर ज्यादा लेना पड़ रहा है। अगर किसी मरीज को सांस संबंधी शिकायत है तो वह तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
- डॉ. एसडी जोशी, वरिष्ठ फिजिशियन (दून अस्पताल)