ऋषिकेश
मार्च-113.96
अप्रैल-58.55
मई-91.52
जून-93.85
जुलाई-101.31
अगस्त-108.91
सितंबर-113.64
हरिद्वार
मार्च-123.32
अप्रैल-46.08
मई-49.43
जून-78.29
जुलाई-78.8
अगस्त-78.5
सितंबर-87.21
हल्द्वानी
मार्च-109.01
अप्रैल-68.66
मई-92.01
जून-106.32
जुलाई-105.89
अगस्त-110.74
सितंबर-109.06
काशीपुर
मार्च-129.32
अप्रैल-76.3
मई-103.95
जून-114.32
जुलाई-114.06
अगस्त-उपलब्ध नहीं
सितंबर-120.23
रुद्रपुर
मार्च-127.08
अप्रैल-75.3
मई-68.66
जून-116.8
जुलाई-120.46
अगस्त-115.91
सितंबर-125.41
नोट:- यह आंकड़ा उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पीएम-10 के मानकों के हिसाब से है।
पीएम-10 वो कण हैं, जिनका व्यास 10 माइक्रोमेटर होता है और इन्हें फाइन पार्टिकल्स भी कहा जाता है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि पीएम-10 को रेस्पायरेबल पर्टिकुलेट मैटर भी कहते हैं। इसमें धूल, गर्द और धातु के सूक्ष्म कण शामिल होते हैं।
पीएम-10 और 2.5 धूल, कंस्ट्रक्शन की जगह पर और कूड़ा व पुआल जलाने से ज्यादा बढ़ता है। सरकार के मानकों के मुताबिक, वायु में पीएम-10 का सालाना स्तर 60 और 24 घंटे का स्तर 100 का सामान्य माना जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस हिसाब से मासिक तौर पर भी 60 के स्तर को ही आदर्श माना जा सकता है।
देहरादून में भी लगातार बढ़ रहा प्रदूषण
राजधानी में भी प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक, मई और जून में तो पीएम-10 करीब 70 के आसपास रहा, लेकिन इसके बाद से लगातार बढ़ते हुए यह 100 के आसपास पहुंच चुका है। दीपावली के दौरान यह और बढ़ने के आसार हैं।