राजधानी दून समेत राज्य के सभी जिलों में फैल रहे इलेक्ट्रॉनिक कचरे (ई-वेस्ट) के निस्तारण को लेकर राज्य पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड गंभीर हो गया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने ई-वेस्ट के आंकलन व उनके निस्तारण के तरीके ढूंढने को लेकर विशेषज्ञों की नौ सदस्यीय समिति का भी गठन कर दिया गया है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव एसपी सुबुद्धि ने बताया कि ई-वेस्ट के आकलन व उनके निस्तारण को लेकर पर्यावरण अभियंता सोमपाल सिंह की अगुवाई में नौ सदस्यीय समिति का गठन कर लिया गया है। समिति में ई-वेस्ट पर काम करने वाली निजी कंपनियों और सामाजिक संगठनों को शामिल किया गया है। फिलहाल पहले चरण में समिति राज्य के पांच बड़े शहरों देहरादून, हरिद्वार, रुड़की, हल्द्वानी और काशीपुर में ई-वेस्ट का आंकलन करने के साथ ही उनके निस्तारण पर काम करेगी।
सदस्य सचिव के मुताबिक समिति शहरों में ई-वेस्ट की स्थिति और वर्तमान में कचरे के निस्तारण को लेकर अपनाए जा रहे तरीकों का अध्ययन करेगी। इसके बाद इन शहरों में ई-वेस्ट कलेक्शन सेंटर (ईडब्ल्यूसीसी) की स्थापना की जाएगी। समिति की ओर से पूरे राज्य में ई-वेस्ट के निस्तारण को लेकर जागरुकता अभियान भी चलाया जाएगा।
फिलहाल राज्य में इलेक्ट्रानिक्स कचरे के निस्तारण को लेकर बोर्ड के पास कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। जबकि केंद्र सरकार द्वारा इसे लेकर काफी जोर दिया जा रहा है। नई नीति में इलेक्ट्रोनिक्स उपकरणों के कारोबारियों द्वारा पुराने और खराब उपकरण वापस लेने का नियम भी शामिल है लेकिन राज्य में ज्यादातर कारोबारियों को इसकी जानकारी नही है।