प्रदूषण नियंत्रण कानूनों का अनुपालन नहीं करने पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 34 फैक्ट्रियों को तत्काल प्रभाव से बंद करने के आदेश दिए हैं। साथ ही राज्य के कई औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित 529 फैक्ट्री संचालकों को नोटिस भी जारी किया है। बोर्ड के इस कड़े कदम के बाद फैक्ट्री संचालकों में अफरातफरी की स्थिति है।
उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में करीब 250 बड़ी औद्योगिक इकाइयां और करीब छह हजार सूक्ष्म एवं लघु उद्योग संचालित हैं। लेकिन, इनमें कई औद्योगिक इकाइयां प्रदूषण नियंत्रण मानकों का पालन नहीं कर रहे हैं। बोर्ड के सदस्य एसपी सुबुद्धि ने बताया कि पिछले तीन महीने में राज्य के औद्योगिक क्षेत्रों में ऐसी 529 फैक्ट्रियों को चिह्नित किया गया, जहां प्रदूषण नियंत्रण के लिए कोई कदम नहीं उठाए गए हैं।
इन फैक्ट्री संचालकों को नोटिस जारी किया गया है। साथ ही पूर्व में नोटिस देने के बावजूद कानून का पालन नहीं करने पर 34 फैक्ट्रियों को बंद करने के आदेश जारी किए गए हैं। उन्होंने बताया कि सभी क्षेत्रीय कार्यालयों से उनके क्षेत्रों में संचालित फैक्ट्रियों का ब्योरा मांगा गया है। आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी। प्रदूषण नियंत्रण के लिए केंद्र सरकार और एनजीटी की पैनी नजर है। वातावरण प्रदूषित करने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती है।
इन औद्योगिक क्षेत्रों की फैक्ट्रियों पर कार्रवाई
बोर्ड सदस्य सचिव एसपी सुबुद्धि ने बताया कि जिन फैक्ट्रियों पर कार्रवाई की गई है, उनमें ज्यादातर हरिद्वार के रोशनाबाद क्षेत्र, भगवानपुर औद्योगिक क्षेत्र, रुड़की, औद्योगिक क्षेत्र काशीपुर, देहरादून के सेलाकुई औद्योगिक क्षेत्र और ऊधमसिंह नगर के सितारगंज क्षेत्र की फैक्ट्रियां शामिल हैं। ये फैक्ट्रियां वायु प्रदूषण के साथ ही भूमिगत जल को बड़े पैमाने पर प्रदूषित कर रही हैं। ज्यादातर फैक्ट्रियों से निकलने वाले कचरे के निस्तारण का उपाय नहीं किया गया है।
हरिद्वार में दो कंपनियों की औचक जांच
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव की अगुवाई में बोर्ड की टीम ने शनिवार को हरिद्वार के रोशनाबाद क्षेत्र में स्थित हिंदुस्तान यूनिलीवर और आईटीसी कंपनी की औचक जांच की। हालांकि, टीम को प्रदूषण नियंत्रण में कोई खास खामी तो नहीं मिली, लेकिन दोनों कंपनियों में प्लास्टिक के ज्यादा इस्तेमाल पर अधिकारियों ने नाराजगी जताई। इसके बाद कंपनी अधिकारियों के साथ बैठक कर सदस्य सचिव एसपी सुबुद्धि ने उनसे कहा कि ऐसा फार्मूला निकालें कि प्लास्टिक का उपयोग कम से कम हो सके।