एक समय था जब चौक, पार्क, अस्तबल, गेट, पेट्रोल पंप...और भी बहुत कुछ पुलिस के घोड़े 'शक्तिमान' के नाम पर करने की होड़ मची थी। 'शक्तिमान' को नायक दर्शाकर फिल्म तक बन गई। समय बदला और 'शक्तिमान' पार्ट टू की पटकथा लिख दी गई। नायक अब खलनायक बन चुका है।
सियासत के लंबरदारों को अब उसकी प्रतिमा भी फू टी आंख नहीं सुहा रही है। रिस्पना चौक से हटाकर उसे अंधेरी कोठरी में बंद कर दिया गया है।
एक समय 'शक्तिमान' अखबारों, न्यूज चैनलों के साथ फे सबुक, टिवट्र और व्हाट्स एप का हीरो बन गया था। हर तरफ से भाजपा विधायक गणेश जोशी और दूसरे आरोपियों की आलोचना हुई। दुनिया भर में शक्तिमान की जिंदगी की सलामत के लिए दुआएं हुईं।
अमेरिका तक से चिकित्सक बुलाए गए, लेकिन 'शक्तिमान' को बचाया नहीं जा सका। 'शक्तिमान' की मौत के साथ पुलिस और सरकार स्तर से उसके नाम पर नामकरण की झड़ी लग गई। बाकायदा घोषणाओं को अमलीजामा भी पहना दिया गया।
समय के साथ 'शक्तिमान' को लेकर सरकार के सुर इस तरह बदल जाएंगे, शायद किसी ने सोचा भी नहीं होगा। पुलिस लाइन में प्रतिमा का अनावरण न करने की बात तो समझ में आती है।
यहां तक भी ठीक है कि अगली सरकार रिस्पना चौक का नाम शक्तिमान करने का निर्णय लेगी पर रिस्पना चौक पर लगाई गई प्रतिमा को हटाने की बात समझ से परे है। आखिर सरकार क्या संदेश देना चाहती है। कल तक जो नायक था, वो अचानक कैसे खलनायक हो गया?
पुलिस लाइन से उखाड़ा शिलापट
पुलिस लाइन में मंगलवार को शक्तिमान की प्रतिमा के अनावरण के लिए पहले ही शिलापट लगा दिया गया था, जिस पर मुख्यमंत्री हरीश रावत, गृह मंत्री प्रीतम सिंह और पुलिस महानिदेशक एमए गणपति और एससपी डा सदानंद दाते की उपस्थिति का उल्लेख था। सीएम के इंकार के बाद शिलापट को उखाड़कर हटा दिया गया है।