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तोड़-फोड़ की राजनीति पहुंच सकती है चरम पर

Tue, 17 Jan 2017 11:27 AM IST
सुधाकर भट्ट/ अमर उजाला, हल्द्वानी
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yashpal arya
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भाजपा की 64 नामों की सूची जारी होते ही यह भी साबित हो गया कि उत्तराखंड में आयाराम-गयाराम की राजनीति और पुख्ता हो गई है।
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टिकटों के ऐलान से ठीक पहले कांग्रेस के बाजपुर विधायक यशपाल आर्य और उनके बेटे संजीव आर्य का भाजपा में शामिल होना और दोनों को भाजपा से टिकट मिल जाना साबित कर रहा है कि भाजपा जीत के लिए हर दांव खेलने का मन बना चुकी है। करीब-करीब यही संकेत कांग्रेस भी दे रही है।

हाल ही में कांग्रेस में हुई बगावत और उसके बाद राष्ट्रपति शासन ने कांग्रेस और भाजपा को दो तिहाई बहुमत का जनमत मांगने के लिए विवश किया था। भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और प्रदेश के मुख्यमंत्री हरीश रावत दोनों ही यही कहते रहे। अब इस दो तिहाई बहुमत के लिए ये सियासी दल कोई भी दांव खेलने को तैयार दिख रहे हैं।
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बाजपुर में यशपाल आर्य को टिकट देकर भाजपा ने जीत के लिए हर दांव खेलने का संकेत दिया। 18 मार्च, 2016 को सदन में मचे सियासी घमासान और उसके बाद राष्ट्रपति शासन के दौरान मुख्यमंत्री हरीश रावत का साथ देने वाले यशपाल आर्य ने भाजपा का दामन थाम कर जरूर अवसरवाद और अति महत्वकांक्षी होने का दाग अपने दामन पर ले लिया। कहा जा रहा है कि आर्य अपने बेटे संजीव आर्य के लिए भी टिकट मांग रहे थे और कांग्रेस में इस बात का विरोध भी हो रहा था।

अब बारी कांग्रेस की है। कांग्रेस के टिकट अब घोषित होंगे। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस की निगाह भी कद्दावर भाजपा असंतुष्ट नेताओं पर है। शर्त यहां भी जीत का दमखम रखने की है। खुद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय कह चुके हैं कि भाजपा के कई असंतुष्ट उनके संपर्क में हैं। ऐसा हुआ तो तोड़ फोड़ की राजनीति प्रदेश में चरम पर होगी।
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18 मार्च, 2016 को सदन में कांग्रेस के विधायकों की बगावत से साबित हो गया था कि प्रदेश में 36 का जादुई आंकड़ा अपनी चमक खो चुका है। यशपाल आर्य का भाजपा में जाना साबित कर रहा है कि चुनाव में प्रदेश की राजनीति अब और नाजुक दौर में पहुंच गई है।
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