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गुरु नेता बना दो ना प्लीज

Wed, 28 Aug 2013 09:58 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
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पेशे से वकील हैं और राजनीति में प्रशिक्षु। जिन्हें गुरु माना है वह पुराने पार्षद हैं। गुरु आजकल अपने चेले को नाम चमकाने के तरीके बता रहे हैं।
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सियासत की बड़ी जमीन देखने के बावजूद अपनी पहली पसंद नगर निगम में ही नजर आते हैं। यहां तक कि फाइलें भी निगम की ही लेकर चलते हैं।

इसके पीछे कारण पूछने पर बताते हैं जिस निगम की बदौलत लोगों ने सिर, माथे पर बिठाया और इस ऊंचाई तक पहुंचाया, उसे कैसे भूल जाऊं? जबकि आलम यह है बरसात के मौसम में अपने ‘वोटरों’ की खैर तक पूछने की फुर्सत इन्हें नहीं।
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वोटर हर रात अपने आशियानों (नदियों पर बने) में जान की खैर मनाते हैं और गुरुजी अपने वोटों की। खुदा का शुक्र है कि आपदा का कहर दून घाटी में नहीं बरसा। वरना नदी, कब की इन वोटरों की खैर ले चुकी होती।
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