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पुलिस तय करेगी किसका गनर रहेगा या किसका नहीं

Sun, 08 Jan 2017 12:49 PM IST
राकेश शर्मा / अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड में चुनावी आचार संहिता लागू होने के बाद अब किसका गनर रहेगा और किसका नहीं। इसका फैसला पुलिस करेगी। 
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महानुभाव की सुरक्षा के खतरे का आकलन कर पुलिस गनर हटाने की संस्तुति गृह विभाग को करेगी, तब जाकर गनर हटाने की प्रक्रिया पूरी होगी। प्रदेश में वर्तमान में करीब 318 सुरक्षाकर्मी गनर के रूप में ड्यूटी बजा रहे हैं। इनमें विधायकों और सांसदों के गनर भी शामिल हैं। देहरादून जिले से अकेले 73 गनर हैं। बड़ी बात यह है कि यह तमाम गनर शासन के आदेश पर उपलब्ध कराए गए हैं।

सत्ताधारी दल के चहेतों को थोक के भाव में गनर बांटे गए। यह बात अलग है कि गनर उपलब्ध कराने का आधार जान को खतरा ही रहा है। हालांकि लोगों की माने तो जान का खतरा कम गनर रखना स्टेटस सिंबल ज्यादा है। वहीं सुरक्षा कर्मियों के आंकड़ों को लेकर विपक्ष सवाल भी उठाता रहा है। विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लगने के बाद चुनाव आयोग ने दायित्वधारियों और दूसरे राजनीतिज्ञों को दिए गए गनरों को हटाने के आदेश दिया था।
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शासन ने सीधे तौर पर कोई फैसला लेने के बजाए गनर हटाने की गेंद जिला पुलिस के पाले में डाल दी। अब एसएसपी के सामने दिक्कत यह है कि शासन के आदेश पर दिए गनरों को बिना लिखित आदेश के कैसे हटाया जाए। इसी ऊहापोह में तीन दिन निकल गए। मामला उछला तो अब कप्तानों से कहा गया है कि वह अपने-अपने जिलों में महानुभाव की सुरक्षा का आकंलन कर यह तय करे, किसका गनर रहेगा और किसका नहीं। जिन लोगों के गनर हटाए जाने है, उनकी संस्तुति कर दी जाए। उसी आधार पर गनर वापस कर लिए जाएंगे। 
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पुलिस करेगी संस्तुति
शासन के आदेश पर जिन महानुभावों को गनर उपलब्ध कराए गए हैं, उनकी सुरक्षा को लेकर पुलिस नए सिरे से समीक्षा करेगी। यदि लगता है कि अब उन्हें कोई खतरा नहीं है तो गनर हटाने की संस्तुति गृह विभाग को कर दी जाएगी। पुलिस संस्तुति के आधार गनर हटाने की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। 
- एमए गणपति, पुलिस महानिदेशक
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