चमत्कारिक गंगोत्री सीट पर जीत कर अपनी-अपनी पार्टी की सरकार बनवाने वाले कांग्रेस के विजयपाल सजवाण और भाजपा के गोपाल सिंह रावत प्रदेश में एक बार फिर अपनी पार्टी की सरकार बनवाने के लिए आमने-सामने हैं। यहां आर-पार की लड़ाई के लिए मैदान सज गया है।
पिछले चुनाव के संयोग इस बार भी दोहराए गए तो इस सीट से विजेता पार्टी के सिर ही सत्ता का सेहरा बंधेगा, लिहाजा दोनों ही पार्टियों ने अपनी प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष ताकत इस सीट पर झोंक दी है। ताजी स्थिति पर नजर डालें तो इस चुनावी संग्राम में भाजपा के बागी प्रत्याशी सूरतराम नौटियाल को भी नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है।
यह सीट इस लिहाज से अहम है कि उत्तराखंड बनने के पहले से पिछले विधानसभा चुनाव तक संयोग रहा है कि इस सीट (उत्तरकाशी) से विजेता पार्टी की ही सरकार बनती रही है। राज्य गठन के बाद यहां अभी तक हुए चुनाव में दो बार कांग्रेस और एक बार भाजपा का दबदबा रहा है।
राज्य गठन के बाद गंगोत्री विधानसभा सीट से पहली बार कांग्रेस के टिकट पर विजयपाल सिंह सजवाण विधानसभा पहुंचे थे। तब प्रदेश में सरकार भी कांग्रेस की ही बनी थी। इसके बाद 2007 के चुनाव में भाजपा के गोपाल सिंह रावत विधायक बने थे, तब भाजपा की सरकार प्रदेश में आई थी।
रोचक बात यह है कि इस बार यही दोनों किरदार मैदान में आमने-सामने हैं। 2012 के चुनाव में विजयपाल सजवाण फिर विधायक बने और राज्य में भी कांग्रेस की सरकार बनी थी। अब राज्य का चौथा विधानसभा चुनाव होने जा रहा है। इस बार 81121मतदाताओं वाली गंगोत्री विधानसभा सीट से नौ प्रत्याशी मैदान में हैं। यूकेडी ने विष्णुपाल सिंह रावत, सीपीआई ने महावीर प्रसाद भट्ट, बसपा ने विजयपाल तंगानी, राष्ट्रीय जन सहाय दल ने राजवीर परमार को टिकट दिया है।
इसके अलावा तीन निर्दलीय प्रत्याशी सूरतराम नौटियाल, पूर्व पालिकाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौहान, रतन लाल वर्मा मैदान में हैं। 49 साल तक भाजपा में रह चुके सूरतराम नौटियाल अपनी महापंचायतों और जनसभा में अच्छी खासी भीड़ जुटाने में कामयाब हो रहे हैं। इस खबर ने फिलहाल भाजपा खेमे की पेशानी पर बल डाल रखा है।