राजनीतिक दल और राजनेता तानाशाही के मामले में इंदिरा गांधी को रोल मॉडल मानकर काम कर रहे हैं। राजनेता चाहते हैं कि उनके लिए केवल अच्छा ही लिखा जाए। प्रसिद्ध लेखिका और पत्रकार सागरिका घोष ने शुक्रवार को लिट फेस्ट के दौरान इंदिरा पर लिखी अपनी पुस्तक के हवाले से आज के राजनेताओं पर टिप्पणी की।
उन्होंने कहा कि जहां नेताओं से सवाल पूछे जाते हैं या काम पर सवाल उठाए जाते हैं, वहां उनका एकदम अलग चेहरा सामने आता है। सागरिका घोष ने राजनीतिक दलों और राजनेताओं से प्रेस की स्वतंत्रता का सम्मान करने का आह्वान किया है।
उन्होंने कहा कि नेताओं को यह समझना होगा कि प्रेस भी उसी लोकतंत्र का एक स्तंभ है, जिसका हिस्सा व्यवस्थापिका और कार्यपालिका है। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी को लेकर अलग-अलग लोगों के विचार भिन्न हैं, लेकिन एक प्रशासक के रूप में सब उनकी खूबियों की कद्र करते हैं।