गंगा घाटी से लेकर दुगड्डा, आमसौड़ और लैंसडौन के पास धोबीघाट तक फैली 83,498 मतदाताओं वाली यमकेश्वर विधानसभा में इस बार त्रिकोणीय मुकाबले के आसार बन रहे हैं।
इस सीट पर वोट बैंक में सेंधमारी बचाना भाजपा और कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। इस चुनाव में भाजपा और कांग्रेस दोनों ने नए चेहरों पर दांव खेला है, जिससे पांच साल से यहां चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटे बागी और निर्दलीय उन्हें कड़ी चुनौती दे रहे हैं।
यमकेश्वर सीट पर इस बार कुल आठ प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। उत्तराखंड बनने के बाद अभी तक यह सीट भाजपा का गढ़ रही है। अपने लिए सेफ सीट मानते हुए भाजपा ने इस बार यहां से लगातार तीन बार चुनाव जीतकर विधायक बनी विजया बड़थ्वाल के बजाय पूर्व सीएम बीसी खंडूड़ी की बेटी ऋतु खंडूड़ी को चुनाव मैदान में उतारा है।
ऐसे में यहां खंडूड़ी की प्रतिष्ठा भी दांव पर मानी जा रही है। भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में पूर्व सीएम खंडूड़ी जनसभाएं कर चुके हैं। अब गोरखपुर के सांसद योगी आदित्यनाथ को भी उनके प्रचार के लिए यमकेश्वर में उतार दिया गया है। भाजपा ने टिकट न मिलने से नाराज चल रही विजय बड़थ्वाल को तो मना लिया है, लेकिन निर्दलीय चुनाव लड़ रहे पूर्व प्रमुख प्रशांत बडोनी को वह नहीं मना सकी हैं। सामाजिक सरोकारों से जुड़े पूर्व प्रमुख प्रशांत बडोनी की क्षेत्र में अच्छी पकड़ मानी जाती है, जिससे वह भाजपा के वोट बैंक में सेंध लगाते नजर आ रहे हैं।
कांग्रेस ने भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए पूर्व विधायक शैलेंद्र सिंह रावत पर दांव खेला है। उनके लिए यमकेश्वर भले ही नया क्षेत्र है, लेकिन इसमें शामिल दुगड्डा विकासखंड की करीब 65 ग्राम पंचायतों के 20 पोलिंग स्टेशन वाले क्षेत्रों में उनकी अच्छी पैठ है। वर्ष 2007 में यह हिस्सा कोटद्वार विधानसभा में था, जहां से शैलेंद्र विधायक रहे हैं। कांग्रेस की बागी यमकेश्वर की पूर्व प्रमुख रेनू बिष्ट निर्दलीय चुनाव लड़ रही हैं।
वर्ष 2007 में वह कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़कर फर्स्ट रनरअप रही थीं। पिछले चुनाव में वह उत्तराखंड रक्षा मोर्चा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़कर सेकेंड रनरअप रही थी। इस बार भी वह पूरे दमखम के साथ चुनाव लड़ रही हैं। वह भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों को बाहरी बताकर सहानुभूति बटोरने का प्रयास कर रही हैं। गैंडखाल की ढांगू पट्टी, स्वर्गाश्रम और नीलकंठ क्षेत्र में रेनू बिष्ट की मजबूत पकड़ है।
यमकेश्वर के अलग-अलग क्षेत्रों में भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीय प्रत्याशियों का अच्छा प्रभाव है, ऐसे में निर्दलीय रेनू बिष्ट तीसरा कोण बनाती नजर आ रही हैं। डाडामंडल के इलाके में जहां भाजपा का अच्छा प्रभाव है, वहीं कोटद्वार से सटे घाड़, दुगड्डा और देवीखाल व भदालीखाल के क्षेत्र में कांग्रेस प्रत्याशी शैलेंद्र मजबूत नजर आ रहे हैं। उनके लिए मुख्यमंत्री हरीश रावत स्टार प्रचारक बनकर सामने आए हैं। ऐसे में भाजपा की नजर कांग्रेस के विभाजित होने वाले वोट बैंक पर है। उत्तराखंड बनने के बाद तीनों चुनाव में कांग्रेस के वोट बिखरने का फायदा सीधे भाजपा को मिलता रहा है। भाजपा प्रत्याशी ऋतु इस क्षेत्र के लिए नई तो हैं, लेकिन वह अपने पिता के प्रभाव और संगठन के बूते जोर-शोर से चुनाव प्रचार में जुटी हैं।
विधानसभा चुनाव-2017
कुल मतदाता-83,498
पुरुष मतदाता-43,926
महिला मतदाता-39571
थर्ड जेंडर-01
यमकेश्वर में वर्ष 2012 के चुनाव के परिणाम
कुल मतदाता-78185
कुल वोट पड़े-42994
किसे कितने वोट पड़े-
भाजपा प्रत्याशी विजया बड़थ्वाल-13842
कांग्रेस प्रत्याशी सरोजनी कैंतुरा-10301-फर्स्ट रनर अप
उत्तराखंड रक्षा मोर्चा प्रत्याशी रेनू बिष्ट-8541-सेकेंड रनरअप
विधानसभा का मुख्य मुद्दा
बिजली, पानी, स्वास्थ्य, सड़कें और शिक्षा मुख्य मुद्दा। स्कूलों में शिक्षकों का और अस्पतालों में डाक्टरों का अभाव। राज्य गठन के बाद सरकार यहां एक डिग्री कालेज तक नहीं खुलवा सकी है। वर्ष 2014 की आपदा से यमकेश्वर का तीन चौथाई हिस्सा प्रभावित रहा। आपदा से क्षतिग्रस्त योजनाओं के लिए पैसा नहीं मिला।