पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडूड़ी की अप्रत्याशित पराजय को लेकर देश भर में चर्चित रही कोटद्वार विधानसभा सीट एक बार फिर हॉट बनी है। इस सीट पर चुनावी जंग भाजपा और कांग्रेस के बीच सिमटती जा रही है।
भाजपा ने जहां कांग्रेस के बागी डॉ. हरक सिंह रावत को मैदान में उतारा है। वहीं कांग्रेस ने विधायक सुरेंद्र सिंह नेगी पर दांव खेला है। हरक के साथ सीट बदल कर चुनाव जीतने का मिथक जुड़ा है। अतीत में वह पौड़ी, लैंसडौन और फिर रुद्रप्रयाग से चुनाव जीत चुके हैं, लेकिन हरक की इस मिथक वाली ताकत पर कांग्रेस प्रत्याशी नेगी बाहरी का हथौड़ा चला रहे हैं।
नेगी का यह हथियार पिछले चुनाव में भी चला था जब उन्होंने महाबली खंडूड़ी को धूल चटाई थी। इस बार फिर से उन्होंने बेहद सधे और सियासी अंदाज में ये तीर हरक पर छोड़ा है। उनके प्रचार में जुटी सेनाएं लाउडस्पीकर पर गीत बजा रही है, ‘तुम तो ठहरे परदेसी साथ क्या निभाओगे... 15 फरवरी के बाद तुम तो घर को लौट जाओगे...’ ये गीत थमता है तो दूसरा शुरू हो जाता है ‘परदेसी-परदेसी जाना नहीं, हमें छोड़के, हमें छोड़के...’ कोटद्वार के झंडाचौक के बीचों-बीच एक बड़ा सा होर्डिंग टंगा है। इस पर लिखा है किसे चुनेंगे आप?
ऐसा जो स्थानीय है या फिर ऐसा जिसे ढूंढते रह जाओगे। बाहरी के मुद्दे से बेचैन टीम हरक ने काउंटर अटैक में तर्क रखा है कि हरीश रावत और शैलेंद्र सिंह रावत भी बाहरी उम्मीदवार हैं। हरक सभाओं में कह रहे हैं कि ऐसे स्थानीय प्रत्याशी का क्या करना जो कोटद्वार को जिला नहीं बना पाया, जबकि उनके प्रयासों से रुद्रप्रयाग, चंपावत और बागेश्वर जिला बनें।
हरक की चुनौती अकेले सुरेंद्र सिंह नेगी नहीं है उन्हें पूर्व विधायक शैलेन्द्र रावत फैक्टर से भी जूझना है। भाजपा से बगावत कर कांग्रेस में गए शैलेंद्र को पार्टी ने पड़ोस की यमकेश्वर सीट से उतारा है। पिछले पांच साल से नेगी उन्हीं को प्रतिद्वंद्वी मानकर तैयारी कर रहे थे। उनके साथ आने से उनका गढ़ माने जाने वाले भाबर क्षेत्र की हवा में अब कांग्रेसी पताकाएं लहराने लगी हैं। बोनस में शैलेंद्र की टीम के कुछ सदस्य भी उन्हें मिल गए हैं।
इसके बावजूद नेगी चौकन्ने हैं, क्योंकि वे हरक सिंह की अचूक चालों से वाकिफ हैं। इन्हीं चालों से वह रुद्रप्रयाग में उलटफेर होते देख चुके हैं। जनरल खंडूड़ी और हरक में यही अंतर हैं। पिछले चुनाव में जनरल अपना प्रचार सेना के भरोसे छोड़कर कोटद्वार से निकल गए थे, लेकिन हरक ने पूरी कमान अपने हाथों में ले रखी है। प्रदेश भर से हरक समर्थकों की टीम कोटद्वार में डेरा जमाए हुए है।
भाजपा के जिलाध्यक्ष शैलेन्द्र सिंह बिष्ट पहाड़ी पार्टी के कैडर को समेटने में लगे हैं, लेकिन बाजी उलटने के लिए यही काफी नहीं। जातीय समीकरण साधने के लिए उन्हें जनरल खंडूड़ी की दरकार है। जनरल एक बार उनके लिए जनसंपर्क कर भी चुके हैं। अब 12 फरवरी को राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के आने के बाद हरक समर्थक हवा का रुख बदलने की उम्मीद कर रहे हैं। उधर, नेगी के समर्थन में आज हरीश रावत ने जो जनसभा की, उसमें जुटी भीड़ से कांग्रेसियों के चेहरे पर चमक दिखी।
बहरहाल, कमजोर और मजबूत पक्ष के हिसाब से ये देखना दिलचस्प रहेगा कि स्थानीय विधायक व स्वास्थ्य मंत्री होने के नाते नेगी के खिलाफ बने एंटी-इनकंबैंसी को भाजपा किस हद तक अपने पक्ष में भुना पाती है। नेगी चुनावी साल में मेडिकल कॉलेज, बेस अस्पताल का शिलान्यास करा चुके हैं और चुनाव में इनका श्रेय लेने की कोशिश कर रहे हैं। भाजपा अधर में लटके चिल्लरखाल व रामनगर मोटरमार्ग को मुद्दा बना रही है। इन दावों प्रति दावों के बीच अस्सी फीसदी पहाड़ी मतदाताओं वाली इस मैदानी सीट में 98,089 मतदाताओं का मिजाज फिलहाल उदासीन बना है। चुनाव में हरक को मोदी लहर का भी आसरा है, मगर कोटद्वार की ये हवा उतनी गर्म नहीं है।
उधर, नेगी का चुनाव क्षेत्र के दलित बहुल झंडीचौड़ और मुस्लिम प्रभाव वाले लकड़ी पड़ाव क्षेत्र को नेगी तगड़ी पैंठ है। कोटद्वार नगरपालिका क्षेत्र में दोनों दलों का प्रभाव है। भाबर और कालागढ़ क्षेत्र में भाजपा आगे रहती है। लेकिन शैलेंद्र सिंह रावत के कांग्रेस में जाने के बाद भाबर क्षेत्र में भाजपा की मजबूती में दरार दिखने लगी है। छह दिन में हरक को ये दरार भी पाटनी है। कुल मिलाकर कोटद्वार का चुनावी समर स्थानीय और बाहरी के बीच सिमट गया है और मूल मुद्दे नेपथ्य में चले गए हैं।