ड्रोन के बढ़ते चलन में खतरों से निपटने के लिए पुलिस भी खुद को तैयार कर रही है। प्रतिबंधित क्षेत्रों में ड्रोन फ्लाइंग को रोकने के लिए अब एंटी ड्रोन गन को शामिल किए जाने पर विचार-विमर्श किया जा रहा है। इसके साथ ही संदिग्ध ड्रोन की जांच के लिए फोरेंसिक सॉफ्टवेयर खरीदने का प्रस्ताव भी तैयार किया जा रहा है। इन प्रस्तावों को जल्द ही शासन को भेजा जाएगा। बताया जा रहा है कि ये उपकरण और सॉफ्टवेयर अत्यधिक महंगे हैं।
बता दें कि बीते कुछ वर्षों में प्रदेश में ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ा है। निजी क्षेत्रों में भी ड्रोन को लेकर तमाम तरह के प्रयोग हो रहे हैं। कुछ शौकिया ड्रोन उड़ाने वाले भी इस फेहरिस्त में शामिल हो रहे हैं। लेकिन, जहां तक देहरादून की बात है तो यहां पर आधे से ज्यादा क्षेत्र संवेदनशील क्षेत्र ही माना जाता है। कदम-कदम पर यहां भारत सरकार के संवेदनशील संस्थान हैं। इनमें डिफेंस क्षेत्र के भी संस्थान मौजूद हैं। इसके अलावा विधानसभा, सचिवालय, पुलिस मुख्यालय व अन्य सरकारी भवन भी संवेदनशील हैं और इन्हें ड्रोन के लिए प्रतिबंधित माना जाता है। ऐसे में ड्रोन यदि इन क्षेत्रों में उड़ेगा तो पुलिस उसे न्यूट्रलाइज्ड (मार गिराने) के लिए भी तैयारियां कर रही है। इसके लिए एक एंटी ड्रोन गन की खरीद पर विचार चल रहा है ताकि समय रहते संदिग्ध ड्रोन को मार गिराया जाए।
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ड्रोन फोरेंसिक सॉफ्टवेयर होगा अहम
संदिग्ध ड्रोन की पहचान के लिए अभी तक कोई सॉफ्टवेयर पुलिस के पास नहीं है। इसके लिए जरूरत पड़ने पर देश की कुछ चुनिंदा लैब का सहारा लिया जा सकता है। लेकिन, पुलिस अब जल्द ही ड्रोन फोरेंसिक सॉफ्टवेयर भी खरीदने पर विचार कर रही है ताकि यदि कोई संदिग्ध ड्रोन मिले तो इसके बारे में पूरी जानकारी हासिल कर ली जाए। इससे सुरक्षा और भी पुख्ता हो जाएगी।
यूटीएम सॉफ्टवेयर भी जल्द होगा शामिल
पुलिस ने पिछले दिनों अनमैंड ट्रैफिक मैनेजमेंट (यूटीएम) सॉफ्टवेयर से ड्रोन की निगरानी का ट्रायल किया था। यह सॉफ्टवेयर दिल्ली की एक कंपनी का था। लेकिन, कई पहलुओं पर यह खरा नहीं उतरा था। ऐसे में अब दूसरी कंपनी से भी पुलिस करार कर सकती है। ड्रोन के जरिये दवाएं, ब्लड सैंपल और तमाम तरह की सामग्री दूर-दराज के इलाकों में पहुंचाई जा रही हैं। लेकिन, पुलिस को इस बात ठीक पता नहीं चलता है कि आखिर ड्रोन से क्या जा रहा है। यह सॉफ्टवेयर इन्हीं सब शंकाओं के जवाब के लिए जरूरी है। इस सॉफ्टवेयर के जरिये पुलिस प्रदेश में उड़ने वाले नैनो, माइक्रो, स्माल सभी श्रेणियों के ड्रोन की निगरानी कर सकेगी। इसके लिए सभी ड्रोन पंजीकृत किए जाएंगे।
इस वक्त सुरक्षा के मद्देनजर एंटी ड्रोन गन और फोरेंसिक सॉफ्टवेयर खरीदने पर विचार-विमर्श किया जा रहा है। जल्द ही इसका प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।
- कृष्ण कुमार वीके, आईजी, पुलिस दूरसंचार