मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत
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आम को तो छोड़ो यहां तो खास के खास प्रदेश के मुखिया की पत्नी की एफआईआर पर पुलिस कुंडली मारकर बैठ गई है। चार दिनों से जांच के नाम पर पुलिस एक कदम भी नहीं खिसक पाई है। तीन दिनों से सिर्फ साक्ष्य जुटाने के प्रयासों का दावा किया जा रहा है। जबकि, सारे साक्ष्य पुलिस के सामने हैं। पुलिस को तो बस वादी सुनीता रावत की शैक्षणिक प्रमाण पत्रों की जांच करनी है, उसके सही मिलते ही, सारे आरोप सही सिद्ध हो जाएंगे।
बता दें बृहस्पतिवार देर रात करीब 11 बजे मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की पत्नी सुनीता रावत डालनवाला थाने पहुंची थीं। यहां उन्होंने समाज सेवी और पूर्व भाजपा नेता सुभाष शर्मा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। सुभाष पर आरोप है कि उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस कर सुनीता रावत की शैक्षिक प्रमाणपत्रों को फर्जी बताया था। इन सब बातों को तमाम टीवी चैनलों और समाचार पत्रों ने कवर किया था। इसी तरह की बातें सुभाष ने अपनी फेसबुक पर भी लिखी थी। ऐसे में सुनीता रावत ने पुलिस को बताया था कि इन सबसे उनकी छवि खराब हुई है और शिक्षा विभाग में माहौल खराब हुआ है।
मुकदमा आईपीसी की धारा 469 और आईटी एक्ट के तहत दर्ज किया गया था। लिहाजा इसकी जांच इंस्पेक्टर डालनवाला राजीव रौथाण स्वयं ही कर रहे हैं। रौथाण ने बताया कि अभी वे प्रेस क्लब के सीसीटीवी फुटेज प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं। साथ ही समाचार पत्रों में छपी खबरों की कटिंग आदि जुटा रहे हैं। उन्होंने बताया कि सुभाष शर्मा के फेसबुक अकाउंट के स्क्रीन शॉट भी लिए जाएंगे, जिस पर उन्होंने सुनीता रावत के बारे में बातें लिखीं हैं। इसी तरह की बातें तीन दिन पहले शनिवार को भी पुलिस अधिकारियों ने कही थी। ऐसे में साफ है कि पुलिस ने अभी तक साक्ष्यों जुटाने के सिर्फ प्रयास ही कर रही है।