चर्चित राजेश सूरी हत्याकांड एक बार फिर से सुर्खियों में हैं। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने मामले में पुलिस की ओर से लगाई अंतिम रिपोर्ट (एफआर) निरस्त कर दी है। कोर्ट ने डीआईजी गढ़वाल को मामले की गंभीरता को देखते हुए शीघ्र जांच कर आख्या न्यायालय में प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं। मामले में पुलिस और एसआईटी दो बार फाइनल रिपोर्ट लगा चुकी है।
राजेश सूरी की मौत हाईकोर्ट से लौटते हुए 30 नवंबर 2014 को हुई थी। राजेश सूरी की बहन रीता सूरी ने नगर कोतवाली में हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने तब जांच कर मामले में एफआर लगा दी थी, लेकिन बहन रीता सूरी ने कानूनी लड़ाई जारी रखी। रीता का आरोप था कि पुलिस ने जांच में कई तथ्यों को छुपा दिया। वह हत्या के बाद से अब तक लगातार दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रही हैं। रीता का कहना है कि उसके भाई ने उत्तराखंड में कई घोटालों के मामलों को उजागर किया था। भ्रष्टाचार के मामलों में हाईकोर्ट में भी याचिकाएं लगाई थीं। इसकी वजह से आरोपी उनसे रंजिश रखने लगे और उनकी हत्या कर दी गई। एक बार पुलिस की एफआर निरस्त होने के बाद एसआईटी ने जांच की। एसआईटी ने भी जांच कर एफआर लगा दी, लेकिन कोर्ट ने फिर निरस्त कर दिया। यह तीसरी बार है जब मामले में पुलिस की एफआर निरस्त हुई है। अधिवक्ता रीता सूरी का कहना है कि दोषियों को सजा दिलाने तक उनकी कानूनी लड़ाई जारी रहेगी।