पूर्व मुख्य सचिव एस रामास्वामी के जालसाज बेटे यशोवर्धन को पुलिस ने बृहस्पतिवार को गिरफ्तार किया है। यशोवर्धन पर आरोप है कि उसने खुद को आईपीएस अधिकारी बताकर शहर के दो लोगों से करीब 20 लाख रुपये ठगे हैं। आरोपी ने इनमें से एक को रक्षा मंत्रालय में नौकरी दिलाने का झांसा दिया तो एक की संस्था का पंजीकरण कराने के नाम पर रकम ठगी। यशोवर्धन के पास से आर्मी और पुलिस के लोगो, वर्दियां, आईडी कार्ड और अन्य सामग्री बरामद हुई है। पुलिस ने उसे न्यायालय में पेश किया जहां से आरोपी को जेल भेज दिया गया है। ंएसपी सिटी प्रमोद कुमार ने बताया कि डाकरा बाजार निवासी अंशुल उपाध्याय ने आठ जुलाई को यशोवर्धन के खिलाफ कैंट थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप था कि यशोवर्धन ने उन्हें साईं मंदिर के पास बुलाया और उनकी दिवंगत माता की स्मृति में उनके नाम पर एक कंपनी का पंजीकरण जल्द कराने का झांसा दिया। यशोवर्धन ने अंशुल को अपना परिचय एक आईपीएस अधिकारी के रूप में दिया था। आरोप है कि अंशुल से उसने 15 लाख रुपये ले लिए।इसके बाद बुधवार को सोशल स्टेज हॉस्टल कैनाल रोड की रहने वाली डॉ. अनुषा को भी यशोवर्धन ने खुद को आईपीएस अधिकारी बताया। उन्हें झांसा दिया कि वह उनकी नौकरी रक्षा मंत्रालय में डाटा साइंस कंसलटेंट के रूप में लगवा सकता है। इसकी एवज ने उसने 4.60 लाख रुपये डॉ. अनुषा से ले लिए। पुलिस ने यशोवर्धन के साथ पीड़ितों की मुलाकात वाले स्थलों की सीसीटीवी फुटेज देखी और तलाश शुरू की। अन्य जानकारियां इकट्ठा की गई। इस बीच पुलिस ने यशोवर्धन को सीएसआई तिराहा मसूरी रोड से गिरफ्तार कर लिया। यशोवर्धन ने पुलिस को बताया कि उसके पिता आईएएस अफसर थे। उसका सपना बचपन से ही अधिकारी बनने का था। पिता से मिलने वाले अफसरों की उसने सुविधा और शक्तियां देखीं तो वह यूपीएससी परीक्षा की तैयारी करने लगा।इसमें वह सफल नहीं हुआ तो उसने धोखाधड़ी का रास्ता चुन लिया। वह लोगों से मिलते वक्त कभी खुद को आईपीएस अधिकारी बताता था तो कभी सेना व रॉ का अफसर। नौकरी दिलवाने, टेंडर दिलाने व सरकारी काम कराने की एवज में उसने कई लोगों को ठगा है। आरोपी आईएचएम कैंपस गढ़ी कैंट की ऑफिशियल रेजिडेंशियल कॉलोनी में रहता है।