चर्चा यह भी सामने आई है कि मामले में खुफिया एजेंसियां जांच कर रही हैं। हालांकि, इन सब बातों से एसएसपी निवेदिता कुकरेती ने इनकार किया है। उन्होंने बताया कि इस तरह के किसी डॉक्टर के बारे में न तो उन्हें जानकारी है और न अभी तक किसी एजेंसी ने उनसे कोई बात साझा की है।
यदि कोई खुफिया एजेंसी डॉक्टर से पूछताछ करती या देहरादून आती है तो इसकी जानकारी दून पुलिस के पास जरूर होती। अब बताया जा रहा है ट्वीट चंडीगढ़ से किया गया है। डॉक्टर दून में कुछ साल पहले तक प्रैक्टिस करता था। लेकिन, अब चंडीगढ़ में रह रहा है। अब यह चेतावनी इत्तफाक थी या वाकयी उनके पास कोई जानकारी थी, यह जांच का विषय है।
इधर, अब स्थानीय अभिसूचना इकाई ने इस ट्वीटर हैंडल का स्क्रीन शॉट लिया है। अभी तक डॉक्टर के बारे में सटीक जानकारी नहीं मिल पाई है।
26 फरवरी को भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा क्षेत्र में चल रहे जैश-ए-मोहम्मद के सबसे बड़े प्रशिक्षण शिविर पर हमला कर इसे नेस्तनाबूद कर दिया था।
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक इस कार्रवाई में वायुसेना ने 12 मिराज 2000 विमान, सुखोई 30 जेट, एक मिड एयर रिफ्यूलर और दो एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (चेतावनी व नियंत्रण प्रणाली या अवाक्स) का प्रयोग किया था।
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक भारतीय वायुसेना के सभी बेस को अधिकतम अलर्ट पर रखा गया था जिससे स्ट्राइक के जवाब में पाकिस्तान की किसी कार्रवाई का जवाब दिया जा सके। बता दें कि भारतीय वायुसेना ने 1971 के युद्ध के बाद से पहली बार एलओसी (नियंत्रण रेखा) पार की है।
सूत्रों ने मुताबिक वायुसेना ने जैश के प्रशिक्षण शिविर को तबाह करने के लिए लेजर गाइडेड बमों का प्रयोग किया, एक-एक बम एक हजार किलो से ज्यादा वजनी था। यह कार्रवाई सुबह 3.45 बजे शुरू हुई और 4.05 बजे समाप्त हो गई थी। असल स्ट्राइक दो मिनट से भी कम समय तक चली थी।
सूत्रों के मुताबिक पूरे ऑपरेशन की निगरानी दिल्ली स्थित वायुसेना मुख्यालय से शीर्ष कमांडरों द्वारा की जा रही थी, जिसमें वायुसेना प्रमुख एसके धनोआ भी शामिल थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, सेना प्रमुख बिपिन रावत, नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा को पूरे ऑपरेशन के पल-पल की जानकारी दी जा रही थी।
सूत्रों ने बताया कि ऑपरेशन का हिस्सा रहे अधिकतर जेट विमान काफी नीचे उड़े ताकि पाकिस्तानी रडार की पकड़ में न आ सकें वहीं अवाक्स ने मिराज 2000 को रेडियल सुरक्षा दी। मिड एयर रिफ्यूलर एक आईएल-78 विमान था जिसने एलओसी पार नहीं की। उन्होंने बताया कि सभी विमान बिना किसी नुकसान के अपने-अपने बेस पर लौट आए। उन्होंने बताया कि एयर स्ट्राइक के लिए मिराज 2000 फाइटर जेट का प्रयोग उनकी मारक क्षमता व अचूक निशाने की खूबी के चलते किया गया।