पुलिस ने उस कंपनी मालिक व मैनेज समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया था, जिन्होंने भगवानपुर निवासी डाडली निवासी अर्जुन को केमिकल ड्रम उपलब्ध कराए थे। इसी ड्रम से अर्जुन ने जहरीली कच्ची शराब बनाई थी और बाल्लुपुुर निवासी सोनू को शराब बेची थी। सोनू ने यह शराब सहारनपुर के पुंडेन निवासी हरदेवा को बेची थी। एसएसपी जन्मेजय प्रभाकर खंडूड़ी ने बताया कि अभी तक पांच मृतकों की विसरा रिपोर्ट आई है। इन रिपोर्ट में मेथनॉल की पुष्टि हुई है। स्पष्ट है कि कच्ची शराब बनाने के लिए मेथनॉल का प्रयोग क्षमता से अधिक किया गया था। उन्होंने बताया कि अभी अन्यों की रिपोर्ट आनी बाकी है। उधर, सूत्रों की मानें तो अंदाजा लगाया जा रहा है कि अन्य विसरा रिपोर्ट में भी मिथेनॉल होने की बात सामने निकलकर आ रही है।
... तो मिथेनॉल के चलते ही लोगों ने गंवाई आंखों की रोशनी
जहरील शराब कांड 42 लोगों की जान ले चुका है। वहीं दो लोग ऐसे भी हैं जो बच तो गए हैं, लेकिन आंखों की रोशनी चली जाने के कारण जिंदगी भर के लिए अंधेरे में जीने को विवश हो गए हैं। जानकारों की मानें तो मिथेनॉल का सीधा असर दिल और आंखों की रोशनी पर पड़ता है। जितने लोगों की जाने गई हैं, उनमें से अधिकतर ने तबीयत बिगड़ने के बाद परिजनों से आंखों से नहीं दिखने की शिकायत की थी। विसरा रिपोर्ट आने के बाद यह साबित हो गया है कि शराब में मिथेनॉल की मात्रा ने ही लोगों की जान ली।