साहित्य संगम पछवादून की ओर से गढ़वाल सभा में आयोजित कार्यक्रम में कवियों ने अपनी रचनाओं की शानदार प्रस्तुति दी। इस अवसर पर वरिष्ठ कवि जयकृष्ण डिमरी की पुस्तक चिदश्रु का विमोचन भी किया गया।
हास्य कवि नाथीराम देहाती ने भारत-पाकिस्तान के मौजूदा हालात पर कटाक्ष करते हुए कहा कि भारत में से निकला है तू, सुन ले बेटा पाकिस्तान, एटम बम की धौंस न देना, तेरा बाप है हिंदुस्तान... सुनाकर वाहवाही लूटी।
संतोष गोयल राजवंशी ने कहा कि दे दिए आपने दर्द ओ गम शुक्रिया...। मनोहर सिंह ने कहा कि हाल अपने दिल का कैसे सुनाऊं मैं, गफलत में सो गए, उन्हें कैसे जगाऊं मैं। एंजल वीनस बिरला ने बच्चों की अहमियत को कुछ इस तरह बयान किया कि बच्चों के बिन सूने घर में, वृद्ध, जवां सब रोते हैं, खाकर पीकर खेल के हंसकर, सब का मन वें हरते हैं। डाॅ. मदनपाल बिरला गजब ने कहा कि कवि के हृदय में देश रहता है, वह झूठ नहीं हमेशा सच कहता है।
सरस्वती उनियाल ने कहा कि डस रहे हैं नाग नशे के इस पीढ़ी को, नरक की आग में धकेल रहा नशा पीढ़ी को। गीता प्रसाद भट्ट ने कहा कि चित के आंसू, चिदश्रु कहलाता है, तीर मारकर दिल मेरा सहलाता है। गुरुराम राय इंटर काॅलेज सहसपुर के प्रधानाचार्य डाॅ. रविंद्र सैनी ने कहा कि जितना लिखते जाओगे, उतनी खुशियां पाओगे। इस अवसर पर गढ़वाल सभा के अध्यक्ष रोशन नेगी, पूर्व पालिका अध्यक्ष शांति जुंवाठा, सुनीता रावत, डाॅ. कामेश्वर प्रसाद डिमरी, हेमचंद्र सकलानी, सुमन ममगाई, सर्वेश्वर दत्त खाली आदि उपस्थित रहे।