जिम कार्बेट नेशनल पार्क और राजाजी नेशनल पार्क में बाघ जैसे दुर्लभ प्रजाति के जंगली जीवों के शिकार किए जाने का मामला पीएमओ तक पहुंच गया है। आपरेशन आई आंफ द टाइगर के मुख्य पदाधिकारी एवं उत्तराखंड राज्य वन्यजीव सलाहकार बोर्ड के सदस्य राजीव मेहता ने वन्य जीवों की सुरक्षा में गंभीर शिथिलता बरतने का आरोप लगाने हुए प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है।
इतना ही सलाहकार बोर्ड सदस्य ने प्रकरण से वन एवं पर्यावरण मंत्री को अवगत कराते हुए प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। राज्य वन्यजीव सलाहकार बोर्ड सदस्य का आरोप है कि एसटीएफ की कार्रवाई में गिरफ्तार शिकारियों के बयानों पर गौर फरमाएं तो अकेले कार्बेट टाइगर रिजर्व में ही पिछले तीन साल के भीतर 20 से 25 बाघों का शिकार ह़ुआ है।
15 मई 2016 को एसटीएफ टीम ने रायवाला के पास बाघ की खाल के साथ चार आरोपी शिकारियों को गिरफ्तार किया था। नेशनल टाइगर डाटा बेस के मिलान और भारतीय वन्य जीव संस्थान की जांच में पता चला कि बरामद की गई छह खाल में से चार खाले कार्बेट टाइगर रिजर्व के बाघों की है।