मुख्य सचिव ओम प्रकाश ने कहा कि बदरीनाथ मास्टर प्लान की औपचारिक सहमति प्राप्त होने के बाद इस पर कार्य आरंभ होगा। उन्होंने उम्मीद जताई की कि तीन चार महीनों में यह कार्य आरंभ हो सकता है। पहले चरण में सरकारी भूमि पर बने भवनों को विस्थापित किया जाएगा। दूसरे चरण में अन्य भवनों को उचित मुआवजा और उपलब्धता के अनुसार भूमि दी जाएगी।
केदारनाथ पुनर्निर्माण कार्यों की भी जानकारी
मुख्य सचिव ने बतायाकि शंकराचार्य के समाधि स्थल का काम तेजी से चल रहा है। सरस्वती घाट पर आस्था पथ का काम पूरा हो गया है। दो ध्यान गुफाओं का काम इस माह के अंत तक पूर्ण हो जाएगा। ब्रह्म कमल की नर्सरी के लिए स्थान चिन्हित कर लिया गया है। नर्सरी के लिए बीज एकत्रीकरण का कार्य किया जा रहा है। पुल का पुनर्निर्माण कर लिया गया है।
प्रदेश के अन्य धार्मिक स्थल बनेंगे स्प्रिचुअल मिनी स्मार्ट सिटी
प्रधानमंत्री के बदरीनाथ धाम को स्प्रिचुअल मिनी स्मार्ट सिटी बनाए जाने पर मुख्य सचिव ने कहा कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत इस कार्य किया जाएगा। अभी यह विचार के स्तर पर है। बदरीनाथ धाम के मॉडल पर प्रदेश के अन्य धार्मिक स्थलों को भी स्प्रिचुअल मिनी स्मार्टसिटी के तौर पर विकसित किया जाएगा। इसकी फंडिंग केंद्र सरकार कर सकती है।
-बदरीनाथ धाम के मास्टर प्लान में 85 हैक्टेयर क्षेत्र लिया गया है।
- मास्टर प्लान के पहले चरण पर 481 करोड़ रुपये होंगे खर्च, यहां देवदर्शिनी स्थल विकसित किया जाएगा
-एक संग्रहालय व आर्ट गैलेरी भी बनाई जाएगी
-दृश्य एवं श्रव्य माध्यम से दशावतार के बारे में जानकारी दी जाएगी
-बदरीनाथ मास्टर प्लान को 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य
-मास्टर प्लान को पर्वतीय परिवेश के अनुकूल बनाया गया है
बदरीनाथ धाम व केदारनाथ धाम के विकास कार्यों में स्थानीय लोगों का सहयोग मिल रहा है। निकटवर्ती गांवों में होम स्टे पर काम किया जा रहा है। सरस्वती व अलकनंदा के संगम स्थल केशव प्रयाग को भी विकसित किया जा सकता है। मास्टर प्लान पर काम करने में भूमि की समस्या नहीं होगी। बदरीनाथ में भी 12 महीने के कार्य होंगे।
-त्रिवेंद्र सिंह रावत, मुख्यमंत्री।