स्कूलों में प्रोजेक्टर, टीवी और रेडियो के माध्यम से प्रधानमंत्री का संदेश सुना गया। परीक्षा के दौरान छात्र-छात्राएं तनाव पर कैसे नियंत्रण रखें और तनावरहित होकर कैसे तैयारी करें, इसको लेकर प्रधानमंत्री स्कूली बच्चों से बातचीत की।
साथ ही विभिन्न माध्यमों से पूछे गए देशभर के स्कूली बच्चों के सवालों के जवाब भी दिया। पहले यह कार्यक्रम 11 से 12 बजे तक प्रस्तावित था, जिसका समय बदलाव कर दोपहर 11:45 से 12:45 बजे तक कर दिया गया। सभी स्कूलों को कार्यक्रम के प्रसारण की व्यवस्था के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य शिक्षाधिकारी एसबी जोशी ने बताया कि शहर क्षेत्र में अधिकांश स्कूलों में टीवी पर ही प्रधानमंत्री का संदेश प्रसारित किया जाएगा। कुछ इलाके, जहां बिजली या अन्य कारणों से टीवी पर संदेश नहीं चला, वहां बच्चों ने रेडियो पर संदेश सुने।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
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इस तरह का कार्यक्रम भी पहली बार है और ऐसा नजारा भी। पथरीबाग स्थित श्री लक्ष्मण इंटर कालेज का सभागार एक बड़ी क्लास में तब्दील है। पूरा हाल छात्रों से भरा है। मंच के ऊपर स्क्रीन पर निगाहें लगी हैं। शुक्रवार दोपहर 12.45 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्क्रीन पर नजर आए। साथ ही बच्चों में चौकन्नापन आ गया।
पहला सवाल पीएम मोदी की तरफ से हुआ। आप टेंशन में हैं क्या? भूल जाइये आप पीएम से बात कर रहें। आज मैं अपने परिवार में हूं। (हंसकर) आज परीक्षा तो मेरी है। सभागार में बैठे बच्चे हंस दिए। निगाहें और कान दोनों स्क्रीन पर लग गए। ‘भीतर का विद्यार्थी कभी मरने न दें, विद्यार्थी जीता है तो ताकत देता है।’ बच्चे बस्ते को गोद में रख संभल कर बैठ गए।
पीएम मोदी के तकरीबन 10 मिनट के शुरुआती संबोधन ने कुछ ऐसा असर डाला कि छात्रों ने आपस में फुसफुसाना बंद कर दिया। लगा कि मोदी कक्षा के अंदर खड़े होकर रू-ब-रू हैं। ‘आत्म विश्वास किसी जड़ी-बूटी से नहीं आता। अपने में आत्म विश्वास पैदा करो।
अपने साथ प्रतिस्पर्धा करो।’ जैसे-जैसे मोदी बात करते लक्ष्मण इंटर कालेज के सभागार में बैठे बच्चों के चेहरों पर भाव आते जाते। जब हंसाते तो सब हंस पड़ते और जब पक्के इरादे की नसीहत करते तो छात्रों के चेहरे पर दृढ़ता का सख्त भाव उभर आता। जब किसी ने अंकों को लेकर मां-बाप के डांटने की बात पीएम से कही, तो लगा जैसे किसी ने यहां सभागार में बैठे बच्चों के मुंह की बात छीन ली।
जब मोदी ने कहा कि अभिभावक इसे अपना सोशल स्टेटस न बनाएं। अपने बच्चे के सामर्थ्य पर ही चर्चा करें। ‘बिल्कुल सही’ दो बच्चे एक स्वर में बोले। मोदी ने जब कहा कि परीक्षा को प्रतिस्पर्धा समझें, अपना एग्जामिनर खुद बनें। ‘फोकस करने के लिए डिफोकस होने’ की जब मोदी ने बात कही तो छात्रों के चेहरे पर चमक आ गई, लगा जैसे ‘गुरुमंत्र’ मिल गया हो।
देहरादून से जब केंद्रीय विद्यालय की छात्रा भावना जलाल ने आईक्यू और ई क्यू पर सवाल किया तो बच्चों ने तालियां बजाईं। इस मौके पर पीएम से मां-बाप के प्रेशर बनाने की शिकायत की गई तो बच्चे खुश हो गए।
बाद में छात्रों ने कहा कि पीएम हमारे और घरवालों के बीच का लिंक हो गए। अब घरवाले भी हमारी भावनाएं समझेंगे। कक्षा 12 के चंदन सिंह नेगी ने बताया कि परीक्षा चर्चा से अब प्लानिंग करने में आसानी हो जाएगी। परीक्षा को लेकर नजरिया बदल गया है। कक्षा 11 के अमित सिंह और मोहम्मद साबिर ने बताया कि अब पेपर के वक्त घबराएंगे नहीं।
सही है घबराने से पेपर हल तो होगा नहीं। मित्रों के साथ व्यवहार भी बदलेंगे। कक्षा नौ के अभिषेक सिंह और आकाश ने कहा कि पीएम मोदी ने बहुत मोटीवेट किया है। अब डिप्रेशन नहीं होगा। अक्सर परीक्षा के दौरान खेलना-कूदना छोड़ देते थे। अब अच्छी प्लानिंग करके परीक्षा देंगे।