नवंबर में बेटे की शादी है, लेकिन घर बचा न रोजगार। बेटे की शादी किसी के सहयोग से कर भी ली तो बहू को रखूंगा कहा। यह कहना है कि पौड़ी जनपद के सैंजी गांव के नीलम सिंह का। आपदा में उनका मकान और दुकान ध्वस्त हो गए हैं। वह परिवार के साथ गांव के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में रह रहे हैं।
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नीलम सिंह ने बताया कि नवंबर में उनके बेटे की शादी है। घर में शादी की तैयारियां शुरू हो गई थीं। 6 अगस्त की आपदा ने सब तबाह कर दिया। उनकी दुकान और मकान आपदा में ध्वस्त हो गए। बेटे की शादी करने के लिए घर ही नहीं है।
प्रधानमंत्री मोदी ने हर संभव मदद का आश्वासन देकर तो गए हैं, लेकिन नवंबर तक घर बनने की कोई उम्मीद नहीं है। सरकार हमें कही विस्थापित कर दे या फिर आवास की व्यवस्था करा दे। नीलम सिंह कहते हैं कि रोजगार के लिए दुकान थी वह भी बह गई है।
सैंजी गांव की बबीता देवी का कहना है कि एक बेटा और एक बेटी है। बेटी की शादी के लिए गहने एकत्र किए थे। आपदा में सब बह गया। पति भी गांव में ही काम करते हैं। रोजगार का कोई साधन नहीं है। आपदा में मकान व गोशाल ध्वस्त हो गई है। सरकार की ओर से पांच लाख की सहायता मिली है, लेकिन यह मकान व अन्य कामों के लिए पर्याप्त नहीं है। ऐसे में आगे का जीवन कैसे चलेगा।