उत्तराखंड को कैशलेस बनने की केंद्र सरकार की मुहिम को 20 बैंक पलीता लगा रहे हैं। जनधन खाताधारकों को रूपे कार्ड उपलब्ध कराने में इनका ढुलमुल रवैया पूरी तरह प्लास्टिक मनी के इस्तेमाल पर पारी फेरने का काम कर रहा है।
हालात यह हैं कि प्रदेश में 17 लाख से ज्यादा जनधन खाताधारकों में से केवल 15 प्रतिशत लोगों के पास ही रूपे कार्ड है। राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की ताजा रिपोर्ट ने प्रदेश में काम कर रहे 20 बैंकों के ढीले रवैये की पोल खोल दी है। केंद्र सरकार को भेजी गई इस रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश में कुल 17 लाख 67 हजार 788 जनधन खाते हैं।
लेकिन इनमें से केवल दो लाख 67 हजार 681 लोगों के पास ही रूपे कार्ड है। मजबूरी में लोग कैश के लिए बैंकों के चक्कर काट रहे हैं। जबकि, बैंक कार्ड नहीं होने का बहाना बनाकर अपना पीछा छुड़ा रहे हैं। सोमवार को हुई राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक में रिजर्व बैंक के महाप्रबंधक सुब्रत दास ने सभी बैंकों को जल्द से जल्द रूपे कार्ड जारी करने के निर्देश दिए।
कुल जनधन खाते और रूपे कार्ड जरूरतमंद
बैंक का नाम - जनधन खाते - बिना रूपे कार्ड के ग्राहक
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया - 497980 - 56307
पंजाब नेशनल बैंक - 292088 - 54687
बैंक ऑफ बड़ौदा - 269123 - 50261
ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स - 125192 - 28137
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया - 80757 - 5325
केनरा बैंक - 91511 - 9008
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया - 42745 - 214
पंजाब एंड सिंध बैंक - 30630 - 0
इलाहाबाद बैंक - 52577 - 4350
यूको बैंक - 81246 - 5814
इंडियन ओवरसीज बैंक - 53820 - 26683
स्टेट बैंक ऑफ पटियाला - 17757 - -31
बैंक ऑफ इंडिया - 38457 - 3914
सिंडिकेट बैंक - 45838 - 3509
विजया बैंक - 2984 - 1913
कारपोरेशन बैंक - 27753 -6915
आंध्रा बैंक - 6210 - 1390
यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया - 3132 - 3223
स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर - 691 - 0
बैंक ऑफ महाराष्ट्र - 7297 - 0
फर्जीवाड़ा भी बन रहा मुसीबत
प्रदेश में तमाम जनधन खाते बैंकों के लिए मुसीबत भी बने हैं। जिस वक्त जनधन खाते खोलने का अभियान चल रहा था, तब तमाम ऐसे भी खाते खुल गए, जिनका एड्रेस प्रूफ केवल स्थानीय पार्षद या ग्रामप्रधान के हस्ताक्षर लिखा पत्र है। जब बैंकों ने रूपे कार्ड देने के लिए उनसे संपर्क किया तो उनका कहीं पता ही नहीं चला।