पाइका के तहत हर गांव में खेल मैदान बनाने की योजना है, लेकिन इसके लिए कोई मानक नहीं है। ऐसे में मर्जी के हिसाब से बड़ा या छोटा मैदान बनाने की छूट दी गई है।
इसके लिए एक लाख रुपये खर्च की सीमा निर्धारित की गई है। पंचायत युवा एवं क्रीडा अभियान (पाइका) के तहत साल 2008-09 से ग्रामीण क्षेत्रों में खेल मैदान बनाने की योजना शुरू की गई, लेकिन मैदान कितना बड़ा या छोटा हो इसके लिए कोई मानक तय नहीं किए गए।
सभी खेलों के लिए मैदान की लंबाई-चौड़ाई के अलग-अलग मानक बने हुए हैं। वॉलीबॉल, फुटबॉल, हॉकी, बास्केटबॉल, क्रिकेट, एथलेटिक्स, बेसबॉल सहित सभी खेल एसोसिएशनों ने इसके लिए बकायदा नियम बनाए हुए हैं।
वहीं पाइका में लगे अधिकारियों की मानें तो गांव में बनने वाले खेल मैदानों के लिए कोई मानक नहीं है। जगह की उपलब्धता के आधार पर मैदान का निर्माण किया जा सकता है।
मैदान बनाने के बाद एक बोर्ड लगाकर उसकी फोटो युवा कल्याण निदेशालय में भेजी जानी आवश्यक है। इससे जुड़े अधिकारी भी कोई मानक न होने की बात स्वीकार कर रहे हैं।
इनकी सुनिए
'हर खेल मैदान के अपने-अपने मानक होते हैं। मसलन, वॉलीबॉल का कोर्ट 18 गुणा 9 के मानक में बनता है। जिसके चारों ओर कम से कम तीन मीटर जगह खाली होनी चाहिए।'
अरुण सूद, वरिष्ठ उपाध्यक्ष जिला वॉलीबॉल एसोसिएशन
'खेल के अनुसार मैदान को तैयार किया जाता है। एथलेटिक्स का मैदान कम से कम 100 मीटर लंबा और 60 मीटर चौड़ा होना ही चाहिए। इससे छोटे मैदान में तैयारी नहीं हो सकेगी।'
मनोज शर्मा, प्रधानाचार्य, स्पोर्ट्स कॉलेज