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पहाड़ को बीमार कर रहीं मैदानी बीमारियां

Sun, 18 Sep 2016 12:29 PM IST
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड के मध्य हिमालयी क्षेत्र के लोगों ने कभी जिन बीमारियों का नाम नहीं सुना था, आज वे उन मर्ज की चपेट में आ रहे हैं।
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जलवायु परिवर्तन के कारण गरमा रहा पहाड़ों का माहौल अब डेंगू, इंसेफ्लाइटिस, मलेरिया, पेट रोग और दूसरे संक्रमण फैलने के लिए उपयुक्त हो गया है। कभी ये बीमारियां मैदानी क्षेत्रों में ही फैलती रहीं है। एक्शन प्लान ऑन क्लाइमेट चेंज और उत्तराखंड डिस्ट्रिक वलनरेबिलिटी असेसमेंट रिपोर्ट-2016 में इसकी तस्दीक हो गई है।

ग्लोबल वार्मिंग से हो रहे जलवायु परिवर्तन के कारण पर्वतीय क्षेत्रों में वायरस और बैक्टीरिया को पनपने वाला माहौल मिल रहा है। वलनरेबिलिटी असेसमेंट रिपोर्ट के हेल्थ इंडीकेटर के मुताबिक टिहरी गढ़वाल, चंपावत वेरी हाई रिस्क जोन में हैं। 
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हरिद्वार, अल्मोड़ा हाई रिस्क और उत्तरकाशी, बागेश्वर, पौड़ी गढ़वाल, ऊधमसिंह नगर, रुद्रप्रयाग को फिलहाल संयत जोन में रखा गया है। चमोली, पिथौरागढ़, देहरादून और नैनीताल तुलनात्मक रूप से सुरक्षित बताए गए हैं, लेकिन यह स्थिति निरंतर बिगड़ रही है।

उत्तराखंड एक्शन प्लान ऑन क्लाइमेट चेंज में भी इन बीमारियों का खतरा बताया गया है। इसमें वायरस, बैक्टीरिया के साथ पानी से फैलने वाली दूसरी बीमारियों का खतरा बताया गया है। जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव से पर्वतीय क्षेत्रों में अस्थमा सरीखी सांस की बीमारियां भी बढ़ रही है।

तापमान बढ़ने से सालमोनेला सरीखे रोगाणु का प्रकोप इन क्षेत्रों में बढ़ सकता है। जलवायु परिवर्तन का दुष्प्रभाव पानी को संक्रमित करने के साथ हवा को भी प्रदूषित कर रहा है जिससे बीमारियों का खतरा और बढ़ेगा।
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उत्तराखंड डिस्ट्रिक वलनरेबिलिटी असेसमेंट रिपोर्ट-2016 के आधार पर क्लाइमेट चेंज सेंटर ने कार्ययोजना तैयार की है। ब्लाक और गांव लेवल पर अध्ययन किया जा रहा है। इसके लिए टीमों को अक्तूबर से क्षेत्रों में भेजा जाएगा।
- आरएन झा, मुख्य वन संरक्षक (पर्यावरण), संयोजक उत्तराखंड क्लाइमेट चेंज सेंटर
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