फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Dehradun: हाउस टैक्स को सर्किल रेट से जोड़ने की योजना फाइलों में कैद, योजना पर मुहर लेकिन नहीं बन पाई नियमावली

Sat, 25 Mar 2023 08:43 PM IST
रेनू सकलानी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

कारपेट एरिया के हिसाब से अब तक हाउस टैक्स की गणना होती थी, लेकिन अब नया कानून आने के बाद इसकी कैलकुलेशन का तरीका बदल जाएगा। जिस क्षेत्र में जो भी सर्किल रेट होगा, उसका 0.1 प्रतिशत से एक प्रतिशत तक हाउस टैक्स होगा। 
विज्ञापन
house tax - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

प्रदेश में हाउस टैक्स को सर्किल रेट से जोड़ने की योजना दो साल से फाइलों में कैद है। शहरी विकास निदेशालय दो बार नियमावली का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज चुका लेकिन कोई निर्णय नहीं हो पाया। नया वित्तीय वर्ष शुरू होने जा रहा है, जिसमें इस बार भी पुरानी पद्धति से ही निकायों में टैक्स लगाए जाएंगे।

विज्ञापन


फरवरी 2021 में हाउस टैक्स को सर्किल रेट से जोड़ने के अध्यादेश को राजभवन ने मंजूरी दी थी। इसके बाद शहरी विकास निदेशालय ने इसकी नियमावली तैयार की थी, लेकिन यह नियमावली केवल हिंदी में थी। मामले में शहरी विकास निदेशालय ने दोबारा हिंदी के साथ ही अंग्रेजी में भी नियमावली बनाकर शासन को भेजी थी। शासन स्तर पर इसका अध्ययन करने के बाद कैबिनेट बैठक में इस पर निर्णय लिया जाना था। अपर मुख्य सचिव आनंदबर्द्धन ने बताया कि इसकी प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही नियमावली कैबिनेट में जाएगी।

ऐसे होनी है हाउस टैक्स की गणना
अभी तक कारपेट एरिया के हिसाब से हाउस टैक्स की गणना होती थी, लेकिन अब नया कानून आने के बाद इसकी कैलकुलेशन का तरीका बदल जाएगा। जिस क्षेत्र में जो भी सर्किल रेट होगा, उसका 0.1 प्रतिशत से एक प्रतिशत तक हाउस टैक्स होगा। मसलन, अगर कहीं सर्किल रेट के हिसाब से किसी प्रॉपर्टी की कीमत एक करोड़ रुपये है तो उसका टैक्स 0.1 प्रतिशत यानी 10 हजार रुपये से लेकर एक प्रतिशत यानी एक लाख रुपये तक होगा।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें...Badrinath Highway: हेलंग बाईपास का निर्माण रुकने से BRO को 10 करोड़ का नुकसान, IIT रुड़की की रिपोर्ट का इंतजार
विज्ञापन


पुराने टैक्स वालों का क्या होगा
अगर सर्किल रेट की कैलकुलेशन के बाद किसी का पुराना टैक्स एक प्रतिशत से अधिक यानी एक लाख रुपये से ज्यादा बैठ रहा है तो उसे पुराना टैक्स ही देना होगा। अगर किसी का टैक्स पहले कम था और सर्किल रेट के आधार पर ज्यादा बन रहा है तो उसी हिसाब से नई दरों पर टैक्स जमा कराना होगा। अगले पांच वर्षों में इसमें पांच प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी नहीं की जा सकेगी।

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें