श्राद्ध में पिंडदान तर्पण और ब्राह्मण को भोजन कराया जाता है। चावल, गाय का दूध, घी, शक्कर और शहद को मिलाकर बने पिंडों को पितरों को अर्पित किया जाता है। जल में काले तिल, जौ, कुशा, दूर्बा और सफेद फूल मिलाकर उससे तर्पण किया जाता है। इसके बाद ब्राह्मण भोज कराया जाता है।
श्राद्ध करने से लाभ
पितृपक्ष में पूर्वजों को याद करके पूजा-पाठ के अलावा दान-धर्म किया जाता है। इन दिनों ग्रहों की शांति के लिए दान-पुण्य और पूजा पाठ किए जाते हैं। ताकि हम पर पूर्वजों की कृपा बनी रहे। श्राद्ध करने से पितरगण वंश विस्तार का आशीर्वाद देते हैं। परिवार सुखी रहता है। जो लोग अपने पितरों का श्राद्ध और तर्पण नहीं करते उनके घर में कुछ न कुछ परेशानियां आती रहती हैं।