उन्होंने कहा कि इन दिनों में शुभ कार्य जैसे वाहन खरीदना, नए मकान की बुनियाद डालना, भूमि खरीदना, वैवाहिक कार्य नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पित्रों का श्राद्ध करने से व्यक्ति तीनों ऋणों से मुक्त हो जाता है।
कुशा की पवित्री(कुश के घास से बनीं अंगूठी) धारण किए बिना तपर्ण कार्य सफल नहीं होते। यदि कोई व्यक्ति श्राद्ध करने में असमर्थ है तो उसे पित्रों की तिथि के अनुसार गाय को चारा देना चाहिए।
जिन लोगों की मृत्यु के दिन की सही जानकारी न हो उनका श्राद्ध अमावस्या तिथि को करना चाहिए। वहीं अकाल मृत्य़ु होने पर भी अमावस्या के दिन श्राद्ध किया जाता है।