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पिथौरागढ़ उपचुनाव: भूपेश ने भाभी चंद्रा के लिए निभाई किंग मेकर की भूमिका, ऐसे बनाई जीत की रणनीति

Fri, 29 Nov 2019 08:52 AM IST
अलका त्यागी कालिका रावल, अमर उजाला, पिथौरागढ़

सार

  • स्वर्गीय पंत के भाई भूपेश समेत पांच लोग थे भाजपा के प्रमुख रणनीतिकार
  • चंद्रा पंत ने 3267 वोटों से जीत दर्ज कर कांग्रेस की अंजू लुंठी को दी करारी शिकस्त
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परिवार के साथ चंद्रा पंत - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तराखंड के पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वर्गीय प्रकाश पंत के छोटे भाई भूपेश पंत प्रत्येक चुनाव में अपने भाई के प्रमुख रणनीतिकार की भूमिका निभाते थे। इसीलिए उन्हें राम का लक्ष्मण भी कहा जाता है।

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इस बार इस लक्ष्मण ने सीता माता (भाभी चंद्रा पंत) के लिए किंगमेकर की भूमिका निभाई। काफी कम मतदान के बाद भी भाजपा इस सीट को जीतने में कामयाब रही। चंद्रा के पूरे चुनाव अभियान की रणनीति बनाने में भूपेश के साथ पार्टी के चार अन्य नेताओं की भी खास भूमिका रही। 

स्वर्गीय प्रकाश पंत ने पहली बार वर्ष 1996 में चुनावी राजनीति में कदम रखा। भाजपा ने अविभाजित उत्तर प्रदेश में कुमाऊं की विधान परिषद की सीट से युवा प्रकाश पंत पर दांव खेला। पंत ने भारी अंतर से यह सीट जीती। इस चुनाव में भी भूपेश सारथी की तरह प्रकाश पंत के चुनाव अभियान का संचालन कर रहे थे।
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राज्य बनने पर अंतरिम सरकार का विधानसभा अध्यक्ष बनाकर पार्टी ने युवा प्रकाश पंत को तवज्जो दी। वर्ष 2002 के पहले विधानसभा चुनाव में प्रकाश पंत ने पिथौरागढ़ से जीत हासिल की। इस चुनाव में भी उनके छोटे भाई भूपेश की अहम भूमिका रही। 

2012 में पंत को हार का सामना करना पड़ा

वर्ष 2007 में एक बार फिर प्रकाश पंत पिथौरागढ़ से चुनाव जीते। वर्ष 2012 में पंत को हार का सामना करना पड़ा। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस तत्कालीन विधायक मयूख महर को विकास पुरुष के रूप में प्रचारित कर रही थी। महर का पलड़ा भी भारी दिख रहा था। इस चुनाव को विषम परिस्थिति में प्रकाश पंत ने जीता। 2017 के चुनाव में भी भूपेश की भूमिका के चर्चे होते रहे। 

विधानसभा उप चुनाव में इस लक्ष्मण ने अपनी भाभी के लिए चुनावी बिसात बिछाई। रणनीति बनाने में भूपेश के साथ सांसद अजय टम्टा, भाजपा प्रदेश प्रवक्ता सुरेश जोशी, प्रदेश महामंत्री राजेंद्र भंडारी और पालिकाध्यक्ष राजेंद्र रावत की अहम भूमिका मानी जा रही है।

इन पांचों लोगों ने कांग्रेस की घेराबंदी को तोड़ने के लिए रणनीति बनाई और कम मतदान के बाद भी सीट जीतने में कामयाब रहे। इस जीत में स्वर्गीय प्रकाश पंत की स्वच्छ छवि का भी अहम रोल है। 

भूपेश के स्थापित होने का था डर

कुशल रणनीतिकार भूपेश पंत को उप चुनाव में भाजपा का प्रबल दावेदार माना जा रहा था। अंत समय में उनका टिकट कट गया। पार्टी हाईकमान ने चंद्रा पंत को टिकट देने की बात पंत परिवार से की। भूपेश पंत के साथ ही परिजनों ने भी चंद्रा पंत को चुनाव लड़ाने का फैसला ले लिया।

टिकट की दौड़ में भूपेश पंत के शामिल होने की बात 23 नवंबर की जनसभा में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने भी मंच से कही। भट्ट का कहना था कि जनता की इच्छा पर चंद्रा पंत को पार्टी ने टिकट दिया लेकिन बात अंदरखाने की करें तो पार्टी के तमाम स्थानीय नेताओं को टिकट मिलने पर भूपेश पंत के स्थापित हो जाने का डर था, इसीलिए तमाम महत्वाकांक्षी लोग भूपेश को किनारे लगाने में जुटे रहे। इस बात की चर्चा मतगणना के दौरान भी लोगों की जुबान पर थी। 

2017 के अंतर को बढ़ाने में कामयाब रहीं चंद्रा पंत
वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में प्रकाश पंत ने कांग्रेस के मयूख महर को 2694 मतों से पराजित किया था। इस बार जीत का अंतर 3267 रहा। यानी चंद्रा पंत पिछले बार की तुलना में 673 मत अधिक लाईं। 
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सपा और नोटा में भी कांटे की टक्कर, बाजी नोटा के हाथ

उप चुनाव में जैसे भाजपा और कांग्रेस में कांटे की टक्कर थी। वैसे ही तीसरे स्थान के लिए सपा प्रत्याशी मनोज भट्ट और नोटा में कांटे का मुकाबला देखने को मिला। बाजी नोटा के हाथ लगी। 844 मतदाताओं ने तीनों प्रत्याशियों को नकारते हुए नोटा का बटन दबाया।

सपा प्रत्याशी 835 मत लाने में कामयाब हो पाए। पहले चक्र में सपा को 76, नोटा को 68. दूसरे चक्र में सपा को 234, नोटा को 104, तीसरे चक्र में सपा को 69, नोटा को 119, चौथे चक्र में सपा को 50, नोटा को 90, पांचवे चक्र में सपा को 43, नोटा को 76, छठे चक्र में सपा को 74, नोटा को 91, सातवें चक्र में सपा को 61, नोटा को 79, आठवें चक्र में सपा को 74, नोटा को 73, नवें चक्र में सपा को 61, नोटा को 55, दसवें चक्र में सपा को 69, नोटा को 60, 11वें चक्र में सपा को 15 और नोटा को 20 मत मिले।  

पोस्टल बैलेट में भी भाजपा ने मारी बाजी
556 पोस्टल मतों में से 255 मत भाजपा के खाते में गए। कांग्रेस को 116 मत मिले। 9-9 मत सपा और नोटा के पक्ष में गए। 167 मत निरस्त हुए। 

मतगणना के लिए कड़ी थी सुरक्षा व्यवस्था
मतगणना पर भारत निर्वाचन आयोग के प्रेक्षक राशिद खान, जिला निर्वाचन अधिकारी/जिलाधिकारी डॉ. वीके जोगदंडे, पुलिस अधीक्षक आरसी राजगुरु, अपर जिलाधिकारी आरडी पॉलीवाल मतगणना स्थल पर लगातार नजर बनाए हुए थे। सुरक्षा व्यवस्था में एसएसबी और पुलिस का कड़ा पहरा था। जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. वीके जोगदंडे ने शांतिपूवर्क चुनाव संपन्न होने पर कर्मचारियों के साथ ही विधानसभा क्षेत्र की जनता को बधाई दी है।
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