एम्स निदेशक ने चिकित्सकीय टीम की सराहना की
संस्थान के जनसंपर्क अधिकारी हरीश थपलियाल ने बताया कि उक्त प्रक्रिया को डॉ. अजय द्वारा रोगी को पूर्ण बेहोशी की अवस्था में रखकर पूरा किया, जिसमें करीब 20 से 25 मिनट का समय लगा।
सांस की नली में अटकी पिन को कुशलतापूर्वक बाहर निकालने में सफल रहे डॉ. सुबोध कुमार का कहना है कि यदि उक्त पिन समय पर नहीं निकाली जाती तो बच्चे को सांस लेने में तकलीफ हो सकती थी, जो कि उसके जीवन लिए घातक भी हो सकती थी। बच्चे को शनिवार रात को चिकित्सकीय निगरानी में एम्स में ही रखा गया, जिसे रविवार को दोपहर में डिस्चार्ज कर दिया गया है।
एम्स निदेशक प्रोफेसर डॉ. रवि कांत ने समय पर उचित उपचार प्रक्रिया मुहैय्या कराकर बच्चे की जान बचाने वाले संस्थान की चिकित्सकीय टीम की सराहना की। उन्होंने कहा संस्थान में विश्वस्तरीय इमरजेंसी सेवाएं जल्द उपलब्ध कराना एम्स की प्राथमिकता है। बताया कि इस दिशा में तेजी से कार्य हो रहा है, जिससे लोगों को सर्वोत्तम स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल सके।