प्रशासन का पूरा फोकस केदारनाथ यात्रा पर है, बावजूद बाजारों से लेकर पैदल मार्ग और धाम में व्यवस्थाएं नाकाफी साबित हो रही हैं। दूसरी तरफ द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर और तृतीय केदार तुंगनाथ धाम की यात्रा भगवान भरोसे चल रही है।
तीन मई से शुरू हुई केदारनाथ यात्रा में शासन, प्रशासन की व्यवस्थाएं पूरी तरह से चरमरा गई हैं। खाने-पीने से लेकर रहने के इंतजाम खानापूर्ति साबित हो रहे हैं। हालात इस कदर हैं कि केदारनाथ धाम में पिछले एक हफ्ते से सैकड़ों यात्री खुले आसमान के नीचे सोने को मजबूर हैं।
छानी कैंप, लिनचोली, भीमबली, जंगलचट्टी, गौरीकुंड, सोनप्रयाग, फाटा, गुप्तकाशी में भी स्थिति अच्छी नहीं हैं। दूसरी तरफ द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर धाम में भी जरूरी इंतजाम तो दूर, सुरक्षा को लेकर भी कोई व्यवस्था नहीं हैं। धाम पहुंचने के लिए रांसी से मद्महेश्वर तक 18 किमी का पैदल रास्ता तय करना होता है, लेकिन इस पूरे रास्ते पर रांसी से गौंडार व गौंडार से खुन्नू के बीच ही पानी व बैठने की सुविधा है। इसके अलावा पूरे मार्ग में कोई इंतजाम नहीं हैं।
हैरत यह है कि शासन, प्रशासन द्वारा भी यात्रा को लेकर न तो यहां सुरक्षा व्यवस्था की गई और न बिजली, पानी, स्वास्थ्य, सफाई, शौचालय, संचार के संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं। इधर, चोपता से 3.5 किमी पैदल दूरी तय कर तृतीय केदार तुंगनाथ पहुंचा जाता है, लेकिन यहां भी सुविधाओं का टोटा बना हुआ है।
कर्नाटक से भुवनेश्वर के त्रिभुवन पटनायक, बंगाल के आशीष झा, कोलकाता के प्रद्युम्न कुमार ने बताया कि वे द्वितीय और तृतीय केदार के दर्शन कर लौटे हैं, लेकिन दोनों धामों में यात्रा को लेकर कोई इंतजाम नहीं हैं। उत्तराखंड सरकार द्वारा चार धाम यात्रा को लेकर यात्रा सुविधाओं के संबंध में जो दावा किया गया था, उसके हिसाब से गंगोत्री, यमुनोत्री, बदरीनाथ, केदारनाथ और इन धामों में दस फीसदी सुविधाएं भी नहीं हैं।