उत्तराखंड के चर्चित ढैंचा बीज घोटाले के मामले में सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत को हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। घोटाले को लेकर दायर जनहित याचिका को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ ने आधारहीन मानते हुए खारिज कर दिया है।
ढैंचा बीज मामले में रघुनाथ सिंह नेगी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। वर्ष 2005-06 में खरीफ की फसल को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई ढैंचा बीज वितरण की योजना में बीज निर्धारित बाजार मूल्य से 60 फीसदी अधिक दर पर खरीदे जाने का मामला उठा था।
बाद में इसमें जांच के लिए त्रिपाठी आयोग का गठन किया गया था। त्रिपाठी जांच आयोग की रिपोर्ट आने के बाद भी कोई कार्रवाई न होने को नेगी ने जनहित याचिका का आधार बनाया था।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से जुड़े इस मामले में इससे पहले गाजियाबाद निवासी जयप्रकाश डबराल ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। डबराल का कहना था कि त्रिपाठी जांच आयोग की रिपोर्ट में बीज मामले में भाजपा सरकार में कृषि मंत्री रहे त्रिवेंद्र सिंह रावत, तत्कालीन कृषि सचिव ओम प्रकाश और तत्कालीन कृषि निदेशक मदन लाल को जिम्मेदार ठहराया गया है।
बाद में डबराल ने याचिका को अन्य तथ्यों और प्रार्थना पत्र के साथ दोबारा दाखिल करने की मांग करते हुए वापस ले लिया था।