सितारगंज क्षेत्र के ग्राम दड़हा फार्म में चार साल पहले 2015 में जयमल सिंह हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रहे एक दोषी की फोटो शुक्रवार को जेल से वायरल होने से पीड़ित परिवार दहशत में आ गया। इस फोटो में जयमल हत्याकांड और दोहरे हत्याकांड का आरोपी प्रभजोत सिंह पुत्र सुरजीत सिंह निवासी दड़हा फार्म दिखाई दे रहा है। यह फोटो गुरी जोहल नाम के युवक ने अपने फेसबुक एकाउंट से शेयर की है।
हत्या के दोषी प्रभजोत सिंह की फोटो शेयर करते हुए पंजाबी में लिखा है कि ‘वेल पुना करी दा हिक ठोक के, जेल चे वी रहिंदा जमाई बन के।’ इसका हिंदी में मतलब है कि ‘बदमाशी भी सीना ठोक कर करते हैं, जेल में भी दामाद बनकर रहते हैं।’ फोटो वायरल होने के बाद जब लोगों के कमेंट आने लगे तो गुरी जोहल ने फोटो रिमूव कर दी। कई लोगों ने इसकी स्क्रीनशॉट ले ली, जो कई व्हाट्सएप ग्रुप पर तैर रही है।
मालूम हो कि 17 जुलाई 2015 में आधा बीघा कृषि भूमि के विवाद में जयमल सिंह को मौत के घाट उतार दिया गया था। जयमल हत्याकांड के बाद जमानत पर रिहा आरोपियों ने सजा से बचने के लिए और गवाहों को मिटाने के लिए एक बार फिर खून की होली खेली थी। 1 जनवरी 2018 को आरोपियों ने नगर कीर्तन में ही दो लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। इस मामले में 16 अप्रैल को जिला न्यायालय रुद्रपुर में हत्या में शामिल 16 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।
जयमल सिंह हत्याकांड के आरोपी की जेल से फोटो वायरल होने के बाद पीड़ित परिवार सकते में आ गया है। पीड़ित परिवार की डरी सहमी महिलाओं ने बताया कि कड़ी सुरक्षा के बीच आरोपी के पास फोन ले जाना कैसे संभव हो गया। पीड़ितों के अनुसार आरोपी प्रभजोत सिंह एवं हरजीत सिंह को करीब सात माह पूर्व ही हल्द्वानी से सितारगंज की सेंट्रल जेल में शिफ्ट किया गया है। वहीं अन्य 14 आरोपी अभी हल्द्वानी जेल में हैं।
मामले की कराएंगे जांच : जेलर पांगती
केंद्रीय कारागार के जेलर जयंत पांगती ने इस मामले की जांच कराने की बात कही है। वहीं प्रभारी वरिष्ठ जेल अधिक्षक/ एसडीएम मनीष बिष्ट से इस बारे में जानने के लिए कई बार फोन मिलाया गया, लेकिन उनका फोन नहीं उठा।
मीडिया को शनिवार को रजिस्टर्ड डाक से भेजा गया एक पत्र मिला, जिसमें जेल मंत्री को संबोधित करते हुए डीडीहाट बंदीगृह के विचाराधीन कैदी ने पिथौरागढ़ बंदीगृह में पिछले एक साल से चार मोबाइल फोन चलने का आरोप लगाया है। कहा कि डेढ़ माह पूर्व जब इन नंबरों का पता थाना पुलिस को लगा तो सभी नंबर बंद कर दिए गए थे, इस समय बंदीगृह के एक कर्मचारी ने नए सिम दिए हैं। मालूम हो कि प्रदेश में कारागार मंत्रालय मुख्यमंत्री के पास है।
कैदी के अनुसार, बंदीगृह में बंदियों को डराया-धमकाया जाता है। उसने पिछले दिनों बंदीगृह में विचाराधीन एक कैदी की ओर से लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों को भी सही ठहराते हुए उसका मेडिकल कराने की मांग की है। इधर विचाराधीन बंदी के नाम से इस तरह के आरोप लगाने वाला पत्र जारी होने से हड़कंप मचा हुआ है।
पत्र के माध्यम से जो आरोप लगाए गए हैं, उनकी जांच की जाएगी। साथ ही पत्र की सत्यता और बंदीगृह से पत्र कैसे बाहर आया इसकी भी जांच होगी।
-रामचंद्र राजगुरु, पुलिस अधीक्षक पिथौरागढ़